संसद का मॉनसून सत्र इन दिनों केवल विधायी कार्यों और बहसों के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर के बाहर रचे जा रहे अजब-गजब सियासी ड्रामों के लिए भी सुर्खियों में है. कांग्रेस समर्थित निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा संसद परिसर में भगवा वस्त्र और संत वेश धारण कर किए गए प्रदर्शन ने पूरे देश के धार्मिक माहौल को गरमा दिया है. अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े कथित मामले को लेकर भगवा पहनकर किए गए इस प्रदर्शन पर देशभर में आक्रोश फैल गया है.
विश्व हिंदू परिषद (VHP), देश के प्रमुख संत समाज और भारतीय जनता पार्टी ने सनातन धर्म और पूज्य साधु-संतों का सीधा अपमान करार दिया है. आइए, इस रिपोर्ट में समझते हैं कि कैसे इस ‘छद्म भगवा’ राजनीति पर संतों और वीएचपी ने तीखे तंज कसे हैं और संसद से लेकर अयोध्या-उज्जैन तक इसका कितना तीखा विरोध शुरू हो गया है.
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विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने संसद परिसर में विपक्षी सांसदों के इस कृत्य पर कड़ा प्रहार किया है. उन्होंने पप्पू यादव, राहुल गांधी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के रवैये पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि जिस प्रकार त्रेतायुग में रावण ने छल-कपट और असत्य को छिपाने के लिए साधु का छद्म वेश धारण किया था, ठीक उसी तरह आज कांग्रेस और सपा के समर्थन से राजनीति करने वाले नेता धार्मिक प्रतीकों का दुरुपयोग कर हिंदू आस्था पर चोट कर रहे हैं. भव्य राम मंदिर बनने के बाद से उपजी बौखलाहट में यह सब नाटक रचा जा रहा है.
डॉ. सुरेंद्र जैन ने विपक्ष को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि इन नेताओं में जरा सा भी साहस है, तो वे किसी अन्य धर्म के धर्मगुरुओं या मौलवियों का वेश धारण कर उनके प्रतीकों का मजाक उड़ाकर दिखाएं. ऐसा करते ही देश की सड़कों पर क्या होगा, वे खुद जानते हैं.
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VHP ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि संसद परिसर में धार्मिक वेशभूषा का अनादर करने वाले सांसदों की सदस्यता और आचरण पर कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए. उन्होंने ने स्पष्ट किया कि वे इस अमर्यादित कृत्य के खिलाफ स्वयं कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं. यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो देश का संपूर्ण संत और हिंदू समाज सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा.
संसद परिसर में भगवा वस्त्रों को सियासी ड्रामे का औजार बनाए जाने से पूरा संत समाज आक्रोशित हो उठा है. श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य नारायणाचार्य शांडिल्य जी महाराज ने देश के सभी 13 अखाड़ों, महामंडलेश्वरों और पूज्य शंकराचार्यों का सीधे तौर पर आह्वान किया है. उन्होंने कहा कि संतों का वेश बनाकर राजनीतिक रोटियां सेकने वाले इन राम-विरोधी और सनातन-विरोधी दलों के खिलाफ अब पूरे संत समाज को एक होकर खड़े होने की जरूरत है.
अयोध्या धाम से स्वामी करपात्री जी महाराज (जानकी कुंज) और हिंदू धर्म सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने भी विपक्षी नेताओं की इस हरकत को घोर निंदनीय बताते हुए कहा कि जो लोग जीवन भर सनातन का विरोध करते रहे, वे आज राजनीतिक लाभ के लिए भगवा पहनकर ढोंग रच रहे हैं. महाकाल लोक उज्जैन से स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज (पीठाधीश्वर, महामृत्युंजय मठ) ने कहा कि भगवा त्याग, साधना और राष्ट्र सेवा का प्रतीक है, इसे राजनीतिक तमाशा बनाना संतों का भारी अपमान है.
अयोध्या से भारतीय जनता पार्टी के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने संसद के बाहर पप्पू यादव और विपक्षी सांसदों के इस प्रदर्शन को पूरी तरह ‘मुद्दाविहीन राजनीति का नौटंकी रूप’ बताया. विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने तथ्यों को सामने रखते हुए कहा कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और कानूनी जांच चल रही है.
विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो ऐतिहासिक काम 10 साल में कर दिखाया, वह विपक्ष 60 सालों में नहीं कर पाया था. इसी बौखलाहट में राम मंदिर को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है. वेद गुप्ता ने तंज कसते हुए कहा कि राम मंदिर के नाम पर विपक्ष का यह ड्रामा अब चलने वाला नहीं है. जनता 2027 के चुनावों में इस ढोंग और नौटंकी का मुंहतोड़ जवाब देगी.
संसद भवन जैसे गरिमामय स्थान पर राजनीतिक विरोध जताने के अनगिनत संवैधानिक तरीके मौजूद हैं. लेकिन राजनीतिक माइलेज हासिल करने के लिए भगवा वस्त्रों और संतों के वेश का स्वांग रचना यह दिखाता है कि विपक्ष के पास अब वास्तविक मुद्दों का अकाल पड़ चुका है. जब कांग्रेस, सपा और पप्पू यादव जैसे नेता अपनी राजनीतिक हताशा छिपाने के लिए साधु का वेश धारण करते हैं, तो वे भूल जाते हैं कि देश की जनता और संत समाज रावण के छद्म वेश और असली साधु के भेद को अच्छी तरह समझता है. सनातन के अपमान की यह राजनीति विपक्षी दलों के लिए भारी पड़ने वाली है.
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