सीबीआई की याचिका, जिसमें जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक के खिलाफ दर्ज मुकदमे को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की गई है, पर सुप्रीम कोर्ट 4 अप्रैल को सुनवाई करेगा. यासीन मलिक, जो वर्तमान में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुआ और कोर्ट ने कहा कि रमजान के बाद उसकी सुनवाई की जाएगी.
कोर्ट का निर्णय और सीबीआई की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने 4 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई के लिए तारीख तय की. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि तिहाड़ जेल में यासीन मलिक की सुनवाई के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, फिर भी अदालत ने उसके पक्ष को सुनने की इच्छा जताई थी. सीबीआई के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया था कि जम्मू के एएसजी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अच्छी व्यवस्था है, जिससे वर्चुअल सुनवाई संभव हो सकती है. लेकिन, कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिरह कैसे हो सकती है.
यासीन मलिक की पेशी और कोर्ट की चिंता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दौरान कहा कि यासीन मलिक को जम्मू-कश्मीर ले जाना उचित नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि यासीन मलिक केवल एक आतंकवादी नहीं है, बल्कि इसके अलावा भी कई पहलुओं से जुड़ा हुआ मामला है. सीबीआई की याचिका का संबंध 1989 में केंद्रीय गृह मंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबैया सईद के अपहरण मामले से है, जिसमें जम्मू की निचली अदालत द्वारा 20 सितंबर 2022 को पारित आदेश के खिलाफ सीबीआई ने याचिका दायर की थी. इस मामले में यासीन मलिक पहले भी अदालत में पेश हो चुका है.
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