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आर्म्स डीलर संजय भंडारी की मुश्किलें बढ़ी, संपत्ति जब्त करने की मांग को लेकर ED पहुची कोर्ट

ED Sanjay Bhandari Case: ब्रिटेन में रह रहे आर्म्स डीलर संजय भंडारी की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रहा हैं. राऊज एवेन्यु कोर्ट ने भंडारी को भगोड़ा घोषित करने के बाद ईडी ने एक बार फिर कोर्ट का रुख किया है. कोर्ट 19 अगस्त को ईडी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगा. ईडी ने कोर्ट में अर्जी दायर कर संजय भंडारी की देशभर में स्थित संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है.

ईडी ने कोर्ट को बताया कि संजय भंडारी से संबंधित देशभर में जितनी भी संपत्तियां है, चाहे वह कंपनी के माध्यम से अर्जित की गई या व्यक्तिगत तौर पर हो उनपर किसी व्यक्ति या संस्था ने शिकायत दर्ज नही कराई है. ऐसे में उनकी संपत्ति को उनकी संपत्ति जब्त किया जा सकता है. ईडी ने भंडारी की इन संपत्तियों को दो भागों में बांटा है. पहली-अपराध के जरिए अर्जित की गई संपत्ति और दूसरी भारत या विदेश में मौजूद ऐसी संपत्ति जिसमें आरोपी की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी हो.

कोर्ट की अनुमति के बिना जब्ती नहीं करेगी ईडी

ईडी का मानना है कि कानूनन इस तरह की संपत्तियों को जब्त करना जरूरी है. ताकि आरोपी विदेश में रहकर कानूनी कार्रवाई से न बच सकें. ईडी ने अपनी अर्जी में यह भी साफ कर दिया है कि कोर्ट के बिना अनुमति के संजय भंडारी की संपत्तियों को जब्त नही करेगी. संजय भंडारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज है और वह 2016 में ब्रिटेन भाग गया था. उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हुआ था. हालही में ब्रिटेन की अदालत ने उसके प्रत्यर्पण से संबंधित ईडी की याचिका को खारिज कर दिया था.

आयकर विभाग ने उसके खिलाफ 2015 में मुकदमा दर्ज किया था, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज किया था. उस पर काला धन को विदेश भेजने, टैक्स की चोरी करने और रक्षा सौदों में रिश्वत लेने का आरोप है. भंडारी को 2020 में ब्रिटेन की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. भंडारी के वकील ने 19 अप्रैल को भगोड़ा घोषित करने की मांग का विरोध किया था और कहा था कि ब्रिटेन में वह कानून के तहत रह रहा है. लंदन हाई कोर्ट ने उसे भारत प्रत्यर्पित करने से मना कर दिया है.

रॉबर्ट वाड्रा केस से भी जुड़ा है संजय भंडारी का नाम

भंडारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने यह भी कहा था कि उनके मुवक्किल का ब्रिटेन में रहना पूरी तरह वैध है और भारत सरकार यूके की अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकती है. भंडारी की ओर से पेश वकील ने यह भी कहा था कि ईडी की याचिका फगिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट की आवश्यक शर्ते पूरी नहीं करती.

उन्होंने कहा था कि इस कानून के तहत आरोपी को तभी भगोड़ा घोषित किया जा सकता है जब उस पर लगे आरोपों की राशि 100 करोड़ या उससे अधिक हो. लेकिन आयकर विभाग के दिल्ली हाई कोर्ट में खुद स्वीकार किया था कि संजय भंडारी के खिलाफ कथित कर चोरी और काले धन के आरोपों की राशि 100 करोड़ से कम है. भंडारी का नाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ धन शोधन मामले में ईडी की जारी जांच में भी सामने आया है.

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाईकोर्ट का आह्वान, बच्चों के लिए डिजिटल दुनिया में भी हो सुरक्षित माहौल

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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