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छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से रानू साहू, समीर बिश्नोई, सौम्या चौरसिया सहित 20 आरोपियों को अंतरिम जमानत

छत्तीसगढ़ के कोयला लेवी घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू, सूर्यकांत तिवारी, समीर विश्नोई, लक्ष्मीकांत तिवारी, मनीष उपाध्याय, निखिल चंद्राकर, पारेख कुर्रे, सौम्या चौरसिया, दीपक टौंक, राहुल कुमार सिंह, शिव शंकर नाग, हेमंत जायसवाल, चंद्रा प्रकाश, संदीप कुमार, रौशन कुमार सिंह, शेख मोइनुद्दीन कुरैशी, रजनीकांत तिवारी, संदीप कुमार नायक, वीरेंद्र कुमार जायसवाल उर्फ मोंटू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कुछ शर्तों के साथ सबको अंतरिम जमानत दे दिया है.

कोर्ट ने गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए कहा है कि जमानत पर बाहर आने के बाद वो छत्तीसगढ़ में नही रह सकते है. जरूरत के हिसाब से जांच अधिकारी के सामने और निचली अदालत में पेश होंगे. रिहाई के एक सप्ताह के भीतर राज्य के बाहर जहां रहेंगे वहां का पता संबंधित थाने में देना होगा.

साथ ही कोर्ट ने जांच में सहयोग करने और पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया है. हालांकि जमानत मिलने के बावजूद आरोपी अभी जेल से बाहर नही आ पाएंगे. क्योंकि ईओडब्ल्यू में दर्ज दूसरे मामले में जेल में ही रहना होगा.

सबूत से छेड़छाड़ पर जमानत रद्द होगी

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि यदि कोई भी आरोपी गवाहों को प्रभावित करने, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या जांच में बाधा डालने की कोशिश करता है कि, राज्य सरकार कोर्ट ने अर्जी देकर उनकी जमानत रद्द करवा सकती है. ये सभी करीब दो साल से अधिक समय से जेल में बंद है. इनकी पूर्व में दायर की याचिकाएं खारिज हो चुकी थी.

छतीसगढ़ में कथित कोयला घोटाले में 500 करोड़ रुपये की अवैध उगाही को लेकर एसीबी ने जांच शुरू की थी, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया था. वसूली के लिए नियमों में बदलाव किया गया था. इस लेवी से हासिल राशि से चल-अचल संपत्तियां अर्जित की गई, जिनमे कई बेनामी भी है.

शराब घोटाले में भी कई अधिकारी रडार पर

इस मामले में सूर्यकांत तिवारी, आईएएस समीर बिश्नोई, आईएएस रानू साहू सौम्या चौरसिया सहित अन्य को गिरफ्तार किया गया था. ईओडब्ल्यू ने सौम्या चौरसिया और उनके परिवार के नाम पर 9 करोड़ 20 लाख रुपए की 29 अचल संपत्ति होने की पुष्टि की है.

वही रानू साहू पर साल 2015 से 2022 तक करीब चार करोड़ रुपये की अचल संपत्ति खुद के नाम से और पारिवारिक सदस्यों के नाम से खरीदने का आरोप है. जबकि उनके सेवा में आने के बाद से 2022 तक का कुल वेतन 92 लाख रुपये बताया जा रहा है. समीर बिश्नोई के पास साल 2010 से 2022 तक का कुल वेतन 93 लाख रुपये है.

इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी प्रीति गोधरा के नाम से 5 करोड़ रुपये की कई अचल संपत्ति ले रखी है, जो उनके वेतन से 500 गुना ज्यादा है. बता दें कि केंद्रीय जांच एजेंसी राज्य में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कथित कोयला खनन और शराब घोटाले की जांच कर रही है. जिसमें उसने कई नेताओं और उनसे जुड़े लोगों के अलावा आईएएस अधिकारियों सहित कुछ प्रमुख अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रही हैं.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर मांगा जवाब, हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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