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CNLU में सीजेआई सूर्यकांत का छात्रों से खुला संवाद, कानून की पढ़ाई से लेकर युवा वकीलों की चुनौतियों पर हुई चर्चा

सीजेआई सूर्यकांत ने पटना स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू) के अशोक ऑडिटोरियम में विधि के छात्रों के साथ खुले संवाद में हिस्सा लिया. छात्रों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सीजेआई सूर्यकांत ने बिना किसी तय स्क्रिप्ट के सीधे सवालों के जवाब दिए. सीजेआई किए गए संवाद के दौरान शांतिपूर्ण छात्र विरोध, युवा वकीलों की आर्थिक परेशानियों, कानूनी शिक्षा की बढ़ती लागत और लॉ की पढ़ाई की अवधि जैसे मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की.

इस दौरान पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सीएनएलयू के चांसलर जस्टिस वी. कामेश्वर राव ब्यहि मौजूद रहे. यह कार्यक्रम यूनिवर्सिटी की एकेडमिक एंड डिबेटिंग कमिटी तथा लीगल एंड सेल की ओर से आयोजित किया गया था. ओपन हाउस के दौरान छात्रों ने सीजेआई के सामने कानून और न्याय व्यवस्था से जुड़े सवाल रखे.

शांतिपूर्ण छात्र विरोध को लेकर एक छात्रा के सवाल पर सीजेआई सूर्यकांत ने शांतिपूर्ण तरीके से जुड़े कई सवाल पूछे. शांतिपूर्ण छात्र विरोधी को लेकर एक छात्रा के.सवाल पर सीजेआई सूर्यकांत ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के छात्रों के अधिकार और ऐसे मामलों में न्यायपालिका की भूमिका पर जोर दिया.

सीजेआई सूर्यकांत ने युवा वकीलों की आर्थिक चुनौतियों पर जताई चिंता

इस जवाब पर ऑडिटोरियम में मौजूद छात्रों ने तालियां बजाकर प्रतिक्रिया दी. युवा वकीलों की आर्थिक परेशानी का मुद्दा संवाद के दौरान शुरुआती वर्षो में युवा वकीलों के सामने आने वाली आर्थिक चुनौतियों का मुद्दा भी उठा. सीजेआई सूर्यकांत ने पहली पीढ़ी के वकीलों के लिए पेशे के शुरुआती दौर में आर्थिक सहायता देने की जरूरत बताया है.

जून 2026 में सीजेआई सूर्यकांत , जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने युवा वकीलों के लिए एक ‘यंग लॉयर्स’ ‘ प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड’ के प्रस्ताव पर विचार किया था. इसका मुख्य उद्देश्य शुरुआती वर्षो में आर्थिक कठिनाइयों का.सामना करने वाले युवा और पहली पीढ़ी के वकीलों को सहायता उपलब्ध कराना है.

बता दें कि हैदराबाद के एनएएलएसएआर और बैंगलोर के एनएलएसआईयू में सीजेआई के विरोध को देखते हुए कार्यक्रम काफी अहम था. सीएनएलयू के वाइस चांसलर प्रो. फैजान मुस्तफा ने पांच साल की लॉ डिग्री को चार साल की पढ़ाई में बदलने का एक साहसी प्रस्ताव रखा, जिसमें आखिरी साल अनिवार्य कोर्ट अप्रेंटिसशिप के तौर पर हो और न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए अलग से एक साल की प्रैक्टिस की जरूरत को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए.

यह भी पढ़ें-अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी: पुलिस की विवेचना रिपोर्ट में CCTV से 105 घटनाएं उजागर, 8 आरोपियों पर शिकंजा; भारत एक्सप्रेस के पास चार्जशीट

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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