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दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में जेल में बंद राशिद इंजीनियर की याचिका पर दिया विभाजित फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ राशिद इंजीनियर की ओर से दायर याचिका पर विभाजित फैसला सुनाया हैं. जस्टिस अनूप जे भंभानी ने राशिद इंजीनियर की याचिका को स्वीकार किया है, वहीं जस्टिस विवेक चौधरी ने इसे खारिज के दिया है. राशिद इंजीनियर ने तिहाड़ जेल से संसद तक कि यात्रा का खर्च वहन करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की थी. अब यह मामला हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया है. जो अंतिम फैसला लेंगे.

पूछताछ में पूर्व विधायक का नाम

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम इस बात पर सहमति नहीं बना सके कि याचिका को किस तरह निपटाया जाए. हमारे विचार आपस में भिन्न हैं. मामले की सुनवाई के दौरान राशिद इंजीनियर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कोर्ट को बताया कि कस्टडी पैरोल में होने वाले 17 लाख रुपए खर्च इंजीनियर को ही वहन करने के लिए कहा गया है. कोर्ट ने सभी पक्षों के जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था. राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है. वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है.

बता दें कि कश्मीरी कारोबारी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान पूर्व विधायक शेख अब्दुल राशिद का नाम सामने आया था. एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को फंड देने के आरोप में वटाली को गिरफ्तार किया था.

आरोप तय करने का आदेश

पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.

एनआईए में मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.

ये भी पढ़ें:आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से आठ सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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