दिल्ली हाई कोर्ट ने मंदिरों के पास तम्बाकू उत्पादों की बिक्री को प्रतिबंधित लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. यह जनहित याचिका मंदिर पुजारी अभिमन्यु शर्मा द्वारा दायर की गई थी.
जनहित याचिका में यह भी कहा गया था कि मंदिरों के आसपास तम्बाकू बेचने वाले विक्रेताओं को कोई अन्य सामान बेचने से रोका जाए.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि हम इस संबंध में कोई आदेश जारी करना उचित नहीं समझते. सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (सीओसीटीआरए) के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार हैं.
शर्मा ने जनहित याचिका के माध्यम से धार्मिक स्थलों के नजदीक तम्बाकू उत्पादों की बिक्री के बारे में चिंता व्यक्त की. उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की प्रथाएं अनुचित हैं और भक्तों और मंदिर जाने वालों के लिए अपमानजनक हो सकती हैं. उन्होंने आगे अनुरोध किया कि इन धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए मंदिरों के आस-पास के क्षेत्रों में किसी भी वस्तु, विशेष रूप से तम्बाकू की बिक्री को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए.
हालाँकि, हाई कोर्ट ने कोई विशिष्ट निर्देश जारी करने से परहेज किया, यह स्पष्ट करते हुए कि ऐसे नियमों का प्रवर्तन मौजूदा कानूनों के तहत संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है. विशेष रूप से, न्यायालय ने सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम की ओर इशारा किया, जो भारत में तम्बाकू उत्पादों की बिक्री और विज्ञापन को नियंत्रित करता है.
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