दिल्ली हाई कोर्ट ने पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में मृतक की पत्नी व उसके मायके वालों को बरी करने के सत्र अदालत के फैसले को बरकरार रखने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आत्महत्या करने की तारीख तक उनकी ओर से उकसाने का कोई कार्य नहीं किया गया था.
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि पीड़ित ने किसी दिन निराशा में आत्महत्या नोट लिखा हो. सुसाइड नोट में न तो ऐसी कोई परिस्थिति बताई गई है, जिसे पत्नी व उसके मायके वालों की ओर से उकसावे के रूप में चिन्हित किया जा सके और न ही इसमें आत्महत्या के किसी भी कारण का खुलासा किया गया है.
दहेज के झूठे मामले में फंसाने की लगातार धमकियां देने का आरोप सामान्य है. यह ऐसा मामला हो सकता है, जहां मृतक अपनी शादी से नाखुश और हताशा था, लेकिन सुसाइड नोट या उसके माता-पिता की बयान से किसी भी तरह के उकसावे का पता नही चलता है.
मृतक विजय सिंह के सुसाइड नोट का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने कहा कि जिस दिन उसने आत्महत्या की थी, उससे पहले उसकी पत्नी और उसके चारों भाइयों की ओर से उकसावे की कोई कार्रवाई नहीं कि गई थी. विजय और उर्मिला की शादी अप्रैल 2008 में हुई थी और विजय ने मई 2010 में आत्महत्या कर ली थी.
-भारत एक्सप्रेस
नवादा जिले के आनंदपुरा इलाके के एक स्कूल में हेडमास्टर पर छात्राओं ने गंभीर और…
UFBU ने 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को तीन दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल…
Tamil Nadu Govt On Ganesh Visarjan: तमिलनाडु सरकार ने NGT को बताया कि 2027 से…
UP News: वाराणसी में पुलिस और ATS ने 30 लाख के इनामी नक्सली बृजेश गंझू…
देश के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक का दौर जारी है, जबकि ओडिशा और…
अगर आप अपने फास्टैग का बैंक बदलना चाहते हैं तो अब नया टैग लगवाने की…