Rouse Avenue Court
दिल्ली जल बोर्ड एसटीपी घोटाला मामले में गिरफ्तार दिल्ली पुलिस के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, नगेंद्र यादव, राज कुमार, पंकज वर्मा की ओर से दायर जमानत याचिका पर राऊज एवेन्यु कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 9 सितंबर को दायर जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगा. सतेंद्र जैन को छोड़कर सभी आरोपी 17 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में है.
सत्येंद्र जैन को कोर्ट ने पिछले दिनों 2 लाख रुपए की निजी मुचलके पर जमानत दे दिया था. कोर्ट ने अपने शर्तो में कहा था कि कोर्ट के बिना अनुमति के देश छोड़कर नही जाएंगे. गवाहों को प्रभावित नही करेंगे. कोर्ट ने आने फैसले में यह भी कहा था कि एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी के बीच 27 महीने का अंतर है.
सत्येंद्र जैन को एसीबी ने 18 अगस्त को दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट्स के टेंडर प्रोसेस में पाई गई गड़बड़ियों के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. रोहिणी एसटीपी की क्षमता को जैन के निर्देशों पर 15-25 एमजीडी से 15-30 एमजीडी किए जाने के आरोप पर जैन के वकील ने प्रस्तुत कहा था कि रिकॉर्ड आरोपों का समर्थन नही कर रहा है.
वही मामले की सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से पेश वकील ने जैन पर आदतन अपराधी है.
एसीबी ने कहा था कि जमानत अर्जी पर फैसला करते समय इन कारणों पर विचार किया जाना चाहिए. एसीबी ने मामले में कुछ 6 लोगो को गिरफ्तार किया है. एसीबी ने जैन के अलावे जिन लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें सत्येंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, तत्कालीन कॉन्ट्रैक्ट कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, एएन इंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट के मालिक राजा कुमार कुर्रा और श्रीजनहार के मालिक पंकज वर्मा शामिल है.
एसीबी ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में घोटाले को लेकर वर्ष 2024 में एफआईआर दर्ज की थी. जांच का एक अहम हिस्सा कथित पैसों के लेनदेन से भी जुड़ा है. अधिकारियों के अनुसार उदित प्रकाश राय तक करीब 1.52 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत पहुंचाए जाने की बात सामने आई है. प्रवर्तन निदेशालय ने भी दिसंबर 2025 में इसी मामले से जुड़े चार एसटीपी टेंडरों को लेकर अभियोजन शिकायत दाखिल की थी.
बता दें कि अक्टूबर 2022 में दिल्ली जल बोर्ड ने 10 एसटीपी को अपग्रेड करने के लिए चार बड़े टेंडर जारी किए थे. इसकी लागत करीब 1943 करोड़ बताई गई. आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर ईईपीएल को फायदा पहुचाया गया था. एसीबी के अनुसार ऐसी शर्ते जोड़ी गई, जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ. जांच में बिचौलियों और अधिकारियों की बातचीत के इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले.
ईमेल से पता चला कि टेंडर दस्तावेज कंपनियों को पहले ही भेज दिए गए थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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