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अमित गांगुली की गिरफ्तारी से बढ़ी सियासी हलचल; टीएमसी नेता देबाशीष कुमार से करीबी संबंधों के संकेत

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन हड़पने, भूमि रिकॉर्ड में जालसाजी और 100 करोड़ रुपये से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अमित गांगुली को गिरफ्तार कर लिया है. जांच एजेंसी ने पीएमएलए (PMLA) के प्रावधानों के तहत उन्हें मंगलवार देर रात को हिरासत में लिया.

फर्जी दस्तावेजों से कब्जा करने का आरोप

ईडी के अनुसार, आरोपी अमित गांगुली के खिलाफ अकेले विभिन्न थानों में कुल 23 एफआईआर दर्ज हैं. जांच एजेंसी का आरोप है कि गांगुली ने अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं की कीमती संपत्तियों पर अवैध तरीके से नियंत्रण हासिल करने के लिए फर्जी बिक्री समझौते (Sale Agreements), फर्जी डीड और अन्य कूटरचित दस्तावेजों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था.

अमित गांगुली लंबे समय से दक्षिण कोलकाता के विभिन्न इलाकों में रियल एस्टेट और प्रमोटिंग का कारोबार चला रहा था. उसके प्रमुख प्रोजेक्ट्स मुख्य रूप से जादवपुर, बेहाला, टॉलीगंज और गरिया जैसे क्षेत्रों में चल रहे थे. उस पर यह भी आरोप है कि वह फर्जी कागजातों के सहारे लोगों की जमीनों पर कब्जा कर अवैध रूप से रंगदारी (Extortion) वसूलता था.

17 ठिकानों पर ED की छापेमारी

इस गिरफ्तारी के साथ ही ईडी ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के इंदौर में कुल 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है. कोलकाता के नारकेलडांगा, नेताजी नगर और रवींद्र सरोवर थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले 6 अलग-अलग ठिकानों पर यह तलाशी अभियान चलाया गया.

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इसके अलावा मध्य प्रदेश के इंदौर में 11 ठिकानों पर भी एक साथ कार्रवाई जारी है. जांच एजेंसी को संदेह है कि निवेशकों से ठगे गए चिटफंड (Chit Fund) के काले धन को रियल एस्टेट और निर्माण कार्यों में निवेश कर सफेद किया जा रहा था.

टीएमसी नेता देबाशीष कुमार से संबंधों की चर्चा

इस मामले में अमित गांगुली की गिरफ्तारी से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई है. शुरुआती जांच में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और पूर्व विधायक देबाशीष कुमार के साथ गांगुली के करीबी व्यावसायिक और व्यक्तिगत संबंधों की बात सामने आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

गोपाल कृष्ण

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