जस्टिस गिरीश कथपालिया ने अपने फैसले में कहा कि मनोज कुमार झा की यह दूसरी अग्रिम जमानत याचिका थी. जो संसद मार्ग थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ी थी.
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 204 के तहत दर्ज किया गया है. मामले की सुनवाई के दौरान पेश पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने मनोज कुमार झा की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया है.
उन्होंने कोर्ट को बताया कि नवंबर 2024 में इसी तरह की याचिका पहले खारिज हो चुकी है. उन्होंने कहा कि मनोज कुमार झा को एक अन्य पीठ ने अंतरिम राहत दी थी, लेकिन वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे. उन्होंने यह भी बताया कि मनोज झा पर दिल्ली, कोलकाता, पंजाब और बिहार में करीब 12 आपराधिक मामले चल रहे हैं, जिससे यह साफ है कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक गतिविधियों का एक लंबा इतिहास रहा है.
मनोज कुमार झा की ओर से पेश वकील ने कहा कि इससे पहले अग्रिम जमानत खारिज होने का मुख्य कारण जांच में सहयोग नहीं करना था. लेकिन अदालत ने साफ किया था कि पहले सभी पहलुओं, जैसे आरोपों की गंभीरता और झा के आपराधिक रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर ही फैसला किया था. लेकिन कोर्ट ने मनोज कुमार झा की ओर से दी गई इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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