लीगल

जजों को बंधक बनाना सोची-समझी साजिश, बंगाल मशीनरी पूरी तरह फेल- CJI सूर्यकांत

पश्चिम बंगाल के मालदा में एसआईआर डियूटी में तैनात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में एक नई याचिका दायर की गई है. यह याचिका सनातनी संसद की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था तंत्र के कामकाज की निगरानी के लिए अदालत से रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति गठित करने के निर्देश देने की मांग की गई है. साथ ही राज्य सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है. इसके अलावे संवेदनशील इलाकों में सीआरपीएफ की तैनाती की भी मांग की गई है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि ईडी अधिकारियों का तबादला निगरानी समिति के बिना नही किया जाए. याचिका में शिकायत तंत्र को मजबूत करने की भी मांग की गई है. ताकि कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकें. दायर याचिका में 2021 विधानसभा चुनाव के दौरान हुई हिंसा का भी जिक्र किया गया है. साथ ही कोलकाता हाई कोर्ट और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है.

सीजेआई सूर्यकांत ने घटना पर स्वतः संज्ञान लिया

इससे पहले सीजेआई सूर्यकांत ने घटना सामने आने के बाद खुद स्वतः संज्ञान लिया था. सीजेआई ने कहा था कि यदि किसी न्यायिक अधिकारी या उसके परिवार को किसी प्रकार का खतरा महसूस होता है, तो उसकी तुरंत समीक्षा कर सुरक्षा मुहैया कराया जाए. कोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे न्यायिक कार्यों में लगे अधिकारी अपना काम सुचारू रूप से कर सके इसके लिए वह सभी आवश्यक कदम उठाए. कोर्ट ने कहा था कि यह सामान्य घटना नही है, बल्कि एक सोची समझी और सुनियोजित साजिश लगती है. कोर्ट ने कहा था यह घटना राज्य मशीनरी की पूरी विफलता है.

कोर्ट ने अधिकारियों के आचरण को निंदनीय बताया

कोर्ट ने अधिकारियों के आचरण निंदनीय बताया था. मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा था कि जिन अधिकारियों का जिक्र हो रहा है, उन्हें चुनाव आयोग ने ट्रांसफर कर दिया था और वे चुनाव आयोग के अधिकारी थे, जिन्होंने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के निर्देशों पर ध्यान नही दिया. इसपर सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि ये अधिकारी कही बाहर से नही आए थे, ये बंगाल के ही हैं और इन्हें इस कोर्ट को जवाब देना होगा. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें आधी रात को आदेश लिखवाना पड़ा, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.

पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान 7 न्यायिक अधिकारियों को 12 घंटे तक बंधक बना लिया गया था. बंधक बनाए जाने वाले न्यायिक अधिकारियों में तीन महिला जज शामिल थी. बाद में पुलिस ने सभी जजों को सुरक्षित निकाला था प्रदर्शकारियों का आरोप था कि दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनके नाम सूची में नहीं जोड़े गए.

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, जमीन विवाद सुलझाने के लिए क्या अब बनेगी ‘राजस्व न्याय सेवा’? केंद्र और राज्यों को नोटिस

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

विधान परिषद चुनाव में किसका पलड़ा भारी? यूपी, बिहार समेत 4 राज्यों में वोटिंग, 27 अक्टूबर को नतीजे

MLC Elections: यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर मतदान…

2 minutes ago

Gajkesari Rajyog 2026: नवंबर की शुरुआत में बनेगा सबसे दुर्लभ ‘गजकेसरी राजयोग’! इन 3 राशियों पर होगी छप्परफाड़ धनवर्षा

Gajkesari Rajyog 2026: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नवंबर 2026 की शुरुआत में सिंह राशि में…

17 minutes ago

दिल्ली में वाहन चोरी, रांची में ठिकाना! कांके में रेड के दौरान 2 थार और 4 बाइक बरामद

रांची के कांके में दिल्ली पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त छापेमारी में दो थार…

27 minutes ago

काशी के आसमान में गरजे राफेल-सुखोई: ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में वायुसेना के करतबों ने किया मंत्रमुग्ध

वाराणसी में भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में राफेल, सुखोई-30 MKI, तेजस…

35 minutes ago

‘थूककर चाटने वाला…’ Ex गर्लफ्रेंड अक्षरा सिंह के पास लौटेंगे पवन सिंह! पत्नी ज्योति ने कसा तंज

पवन सिंह के अक्षरा सिंह से माफी मांगने के बाद पत्नी ज्योति सिंह का वीडियो…

55 minutes ago