Supreme Court
Supreme Court NEET Case: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे सुधारों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि सरकार केवल अस्थायी उपायों का उल्लेख करने के बजाय यह बताए कि सुधारों को स्थायी और संस्थागत रूप देने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं. मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित गवर्निंग बोर्ड, विशेषज्ञों के नेतृत्व वाली इकाइयों, विभिन्न हितधारकों के नामांकन और हार्ड-पावर्ड कमेटी द्वारा सुझाए गए दस प्रमुख सुधार क्षेत्रों पर हुई प्रगति का पूरा ब्यौरा देने को कहा है. अदालत ने सुरक्षा, निगरानी और सतर्कता के लिए हाल ही में नियुक्त अतिरिक्त महानिदेशकों की भूमिका और उनके कार्यों की स्थिति भी स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं.
पीठ ने कहा कि परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद अपनाए जा रहे सुरक्षा उपायों की अलग-अलग स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. इसके अलावा राज्य और जिला प्रशासन के साथ समन्वय, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की छपाई और परिवहन व्यवस्था, मल्टी-सेशन परीक्षा की संभावनाओं तथा कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) लागू करने की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी भी मांगी गई है. अदालत ने डेटा सुरक्षा और उम्मीदवारों के सत्यापन के लिए डिजीयात्रा जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी सरकार का पक्ष जानना चाहा है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने टिप्पणी की कि पेपर लीक के बाद प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना की तैनाती केवल एक अस्थायी व्यवस्था थी और इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पूरे वर्ष इस मामले की निगरानी करेगी ताकि परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे सुधारों को प्रभावी और संस्थागत रूप दिया जा सके. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार जल्द ही नया और विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी.
यह याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने दायर की है. याचिका में NTA को भंग कर नई परीक्षा संस्था गठित करने, नीट-यूजी 2026 परीक्षा दोबारा आयोजित करने तथा परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में हाई-पावर कमेटी बनाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया है कि समिति में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और फॉरेंसिक वैज्ञानिकों को शामिल किया जाए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.
-भारत एक्सप्रेस
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