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NEET UG धांधली: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, जंतर-मंतर हिंसा की जांच के लिए बनेगी विशेष कमेटी

Supreme Court: नीट यूजी धांधली को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान किए गए पुलिस बल प्रयोग के मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट गठित करेगा कमेटी.

पीठ मामले में 19 अगस्त को आदेश पारित करेगी

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम एक कमेटी बना रहे हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, हाई कोर्ट के एक पूर्व चीफ जस्टिस, सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर और डायरेक्टर जनरल के पद से रिटायर्ड एक अधिकारी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि सभी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं देंगे. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ मामले में 19 अगस्त को आदेश पारित करेगी. कोर्ट ने हाई पावर कमेटी के गठन करने से पहले सभी पक्षों से सुझाव देने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत रद्द कर सकता

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने संकेत दिया कि जिन एफआईआर में सिर्फ छात्र आरोपी है, उन्हें सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत रद्द कर सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि वह दिल्ली में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के विडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को जांच के लिए हाई-पवार कमेटी को सौंपने का निर्देश देगा. यह समिति उन महिला प्रदर्शनकरियों की शिकायतों और आरोपों की भी जांच करेगा, जिन्हें दिल्ली और अन्य इलाकों में विरोध मार्च के दौरान निशाना बनाए जाने की खबर थी.

दर्ज कई एफआईआर का मुद्दा उठाया गया

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट को बताया कि पिछली सुनवाई में देशभर में छात्रों और युवा प्रदर्शनकरियों के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर का मुद्दा उठाया गया था. उन्होंने कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत छात्रों के खिलाफ देशभर में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की. इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें एफआईआर रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा कि छात्र प्रदर्शनकरियों के खिलाफ एफआईआर रद्द होनी चाहिए. इसे किस तरह किया जाए, यह कोर्ट तय करें. एसजी मेहता ने स्पष्ट किया कि कुछ ऐसे लोग भी प्रदर्शन में शामिल हो गए थे.

जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास है. ऐसे मामलों की जांच जरूरी है और उन्हें नीट या अन्य परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बराबर नहीं रखा जा सकता. उन्होंने गंभीर अपराधों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें रेप, हत्या, पॉक्सो और अपहरण जैसे मामले शामिल है, न कि छोटे-मोटे अपराध. सीजेआई सूर्यकांत ने राज्यों से कहा है कि वे ऐसी एफआईआर की सूची दें, जिनमे केवल छात्र आरोपी है.

यह भी पढ़ें-छात्र प्रदर्शन पर बिहार सरकार का SC में हलफनामा: ‘पुलिस बर्बरता नहीं हुई, हवा में चली थी AK-47’

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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