Sanjeev Arora money laundering case
Sanjeev Arora money laundering case: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री और कारोबारी संजीव अरोड़ा को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है. उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर अब 28 जुलाई को सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एम्स की मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद ही अंतरिम जमानत पर फैसला लिया जाएगा.
जस्टिस एस.सी. शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पिछली सुनवाई में एम्स से मेडिकल रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन रिपोर्ट अभी तक कोर्ट के समक्ष नहीं पहुंची है. इस पर संजीव अरोड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी. इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई तय कर दी.
संजीव अरोड़ा ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 9 मई को गिरफ्तार किया था और तभी से वह न्यायिक हिरासत में हैं.
हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में स्पेशल कोर्ट में 30 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. जांच एजेंसी ने दावा किया है कि मामले में 103 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई है. ईडी के अनुसार, संजीव अरोड़ा ने करीब 44 हजार आईफोन के दुबई निर्यात का दावा किया, जबकि जांच में ऐसा कोई वास्तविक निर्यात नहीं मिला. एजेंसी का आरोप है कि यह पूरा लेनदेन केवल दस्तावेजों में दिखाया गया और इसके लिए फर्जी खरीद बिल तथा निर्यात संबंधी कागजात तैयार किए गए.
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जांच एजेंसी का कहना है कि आईफोन बिक्री का कारोबार 150 करोड़ रुपये से अधिक का दर्शाया गया. ईडी का आरोप है कि इस कथित फर्जी निर्यात के जरिए निर्यात प्रोत्साहन का लाभ लेने और अवैध धन के स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई.
ईडी ने पहले विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी. जांच के दौरान विदेशी लेनदेन में कथित गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई.
इसके तहत हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के कार्यालयों, चंडीगढ़ स्थित अरोड़ा के आधिकारिक आवास और हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी सहित पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई. ईडी को जांच के दौरान 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी जीएसटी खरीद बिलों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम इनपुट मिले.
61 वर्षीय संजीव अरोड़ा लुधियाना के प्रमुख उद्योगपतियों में गिने जाते हैं. उन्होंने वर्ष 1986 में कारोबार शुरू किया और उनकी कंपनी मुख्य रूप से अमेरिका को सामान निर्यात करती रही है. अमेरिका के वर्जीनिया में भी उनका कार्यालय है. वर्ष 2006 में उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रवेश किया और कंपनी का नाम रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड रखा. इसके बाद चंडीगढ़ रोड पर हैम्पटन बिजनेस पार्क और हैम्पटन होम्स जैसी परियोजनाएं विकसित कीं. वर्ष 2018 में उन्होंने महिलाओं के लिए फीमेला ब्रांड लॉन्च किया और 2019 में मेटल कारोबार में भी कदम रखा.
संजीव अरोड़ा ने अपने माता-पिता की स्मृति में कृष्ण प्राण ब्रेस्ट कैंसर चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की थी. उनके माता-पिता का निधन कैंसर से हुआ था. वह दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के गवर्निंग बोर्ड, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन की एपेक्स काउंसिल और वेद मंदिर ट्रस्ट के सदस्य भी रह चुके हैं.
भारत एक्सप्रेस
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