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‘स्वास्थ्य से खिलवाड़ बंद करो!’ अश्विनी उपाध्याय ने SC में दायर की PIL, कहा- फौरन बने फास्ट ट्रैक व्यवस्था

Supreme Court: देश में नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. दायर जनहित याचिका में नकली और मिलावटी दवाओं, इंजेक्शन, और सिरप की बिक्री व निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई है. यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से अनुच्छेद 32के तहत दायर की गई है.

तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने और एक साल के भीतर ट्रायल पूरा करने के निर्देश की मांग

दायर याचिका में मांग की गई है कि नकली दवाओं से जुड़े मामलों में तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने और एक साल के भीतर ट्रायल पूरा करने के निर्देश देने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में ऐसे मामलों की जांच, जब्त दवाओं की फॉरेंसिक जांच और मुकदमों की सुनवाई के लिए समय सीमा तय नहीं है. दायर याचिका में कहा गया है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के प्रावधानों में बदलाव की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि कानून लागू होने के बावजूद नकली और मिलावटी दवाओं, इंजेक्शन और सिरप का निर्माण और बिक्री जारी है.

विशेष अदालतों की व्यवस्था करने की मांग की गई

याचिका में नकली दवाओं के मामलों की समयबद्ध जांच, जब्त दवाओं के फॉरेंसिक परीक्षण के लिए निश्चित समय सीमा तय करने, ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि मौजूदा कानून में पर्याप्त कड़ें दंड का प्रावधान नहीं है. इसके अलावे अपराध से अर्जित संपत्तियों की पीएमएलए, बेनामी संपत्ति कानून और ब्लैक मनी कानून के तहत जांच और जब्ती की मांग की गई है. इसके साथ ही सर्च और जब्ती की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की मांग की गई है. याचिका में नकली और मिलावटी दवाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक समान एसओपी तैयार करने की मांग की गई है.

दवाओं से गंभीर स्वास्थ्य नुकसान का दावा किया गया

याचिका में नकली दवाओं से गंभीर स्वास्थ्य नुकसान का दावा किया गया है. जनहित याचिका में कहा गया है कि नकली दवाओं का इस्तेमाल लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है. जनहित याचिका में हेपेटाइटिस-बी, लीवर की बीमारी, ह्रदय संबंधी बीमारियों के साथ-साथ श्वसन और न्यूरोलीजिकल समस्याओं का उल्लेख किया गया है. याचिकाकर्ता का दावा है कि नकली दवाओं, वैक्सीन, इंजेक्शन और सिरप से होने वाली मौतों और नुकसान का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था पर पड़ता है.

यह भी पढ़ें-जांच कमेटी के सदस्यों पर सवाल बेबुनियाद: SC ने याचिका ठुकराई, कहा- अंतिम फैसला हमारा ही होगा

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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