सुप्रीम कोर्ट
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में कक्षा 9 से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी शुरू करने के खिलाफ दायर तमिलनाडु सरकार की याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आपको अपनी सोच बदलनी होगी, ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी न पढ़ाई जाए. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि नवोदय राज्य की नीति के खिलाफ नहीं है. कृपया भाषा नीति के बारे में बातचीत करें.
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह राज्य की नीति के खिलाफ है. यह तमिल भाषा पर हावी हो जाती है. उन्होंने कहा कि नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार का स्कूल नहीं है, बल्कि यह एक सोसाइटी द्वारा चलाया जाने वाला स्कूल है. इसमें हिंदी को ही प्रमुखता देने की जिद है. जस्टिस नागरत्ना के कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि केंद्र सरकार की नीति को मानना है या नहीं, यह राज्य सरकार पर छोड़ दिया जाए.
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह एक वैकल्पिक नीति है. अगर कोर्ट कोई आदेश देता है, तो यह इस कोर्ट के 75 साल के फैसलों को पलटने जैसा होगा. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि स्कूल के लिए हर जिले में जमीन चिन्हित करें. इसपर वकील ने कहा कि हमें बैठक करने दें. कोर्ट ने कहा कि चूंकि सरकार बदल गई है, इसलिए हमें उम्मीद है कि सोच में भी बदलाव आएगा. तमिलनाडु सरकार ने कहा कि इस देश में सहकारी संघवाद कभी भी एकतरफा काम नहीं करेगा. लेकिन कोर्ट किसी नीति को लागू नहीं करवा सकता. यह कोई कानून नहीं है. यह एक नीति है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि हमारे पिछले आदेश का पालन करें. हम आपसे जमीन अधिग्रहण करने के लिए नहीं कह रहे हैं. हम सिर्फ पहचान करने के लिए कह रहे है. हम सभी के भले के लिए सोच रहे है.
कोर्ट तमिलनाडु सरकार की उस अपील पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय खोलने की सुविधा देने को कहा गया था. तमिलनाडु ने हमेशा जेएनवी खोलने का विरोध किया है, क्योंकि उसे इन स्कूलों में अपनाई जाने वाली तीन भाषा नीति को लेकर चिंतित है. तमिलनाडु ने लगातार इस स्कीम का विरोध किया है और कहा है कि जेएनवी तीन भाषा की पॉलिसी को फॉलो करते है, राज्य में लंबे समय से चली आ रही दो भाषा पॉलिसी से मेल नहीं खाती है. जस्टिस नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि नीति में कहीं भी तीसरी भाषा के रूप में केवल हिंदी अनिवार्य नहीं कि गई है.
उन्होंने कहा कि राज्य की भाषा, अंग्रेजी और कोई भी तीसरी भाषा पढ़ाई जा सकती है. अपने छात्र जीवन के अनुभव को साझा करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा था कि उनके समय में तीसरी भाषा की पढ़ाई मीडिल स्कूल से शुरू हो जाती थी और जितनी जल्दी इसकी शुरुआत हो, उतना बेहतर है. उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्ड किसी भी बोर्ड में कक्षा 9 से नई भाषा शुरू न कि जाए, क्योंकि 10वीं बोर्ड की तैयारी का दबाव 8वीं के अंत से ही शुरू हो जाता है. जस्टिस नागरत्ना ने तमिलनाडु सरकार को सलाह दिया था कि केवल इसलिए केंद्रीय योजनाओं का विरोध न करें कि पॉलिसी केंद्र सरकार की है. उन्होंने कहा था कि राज्य की अपनी शिक्षा व्यवस्था हो सकती है, लेकिन केंद्रीय स्कूलों की स्थापना में बाधा नहीं डालनी चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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