यूएपीए मामले में दो साल से जेल में बंद आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल नही करने पर आरोपी को जमानत दे दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा यह भयावह है. जस्टिस संदीप मेहता ने आगे कहा कि आप बिना चार्जशीट के किसी को दो साल तक जेल में कैसे रख सकते हैं? कोर्ट ने कहा यह भयावह है, यह गिरफ्तारी वैध कैसे है? क्या आप खुद को देश की प्रीमियम एजेंसी मानते है? कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी को 23 जुलाई 2023 को गिरफ्तार किया गया था और 23 जुलाई 2025 को चार्जशीट दाखिल किया गया.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूएपीए की धारा 43 D के तहत चार्जशीट दाखिल करने की अधिकतम सीमा 180 दिन है. आरोपी को गुवाहाटी हाई कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपी अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था, इसलिए यूएपीए की धारा 43 D (7) के चलते डिफॉल्ट जमानत का लाभ नहीं मिल सकता.
साथ ही हाई कोर्ट ने कहा था कि कोई विशेष परिस्थिति भी नही बताई गई जिससे जमानत उचित हो. इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने असम पुलिस को फटकार लगाते हुए जमानत दे दिया है. असम पुलिस ने 22 जुलाई 2023 को आरोपी को 3.25 हजार भारतीय मुद्रा के साथ हिरासत में लिया था. इसके बाद जुलाई-अगस्त 2023 मेंप्रोडक्शन वारंट जारी करने के बाद औपचारिक तौर पर गिरफ्तारी हुई.
वही यूएपीए के दो अन्य मामले में निचली अदालत से डिफॉल्ट जमानत मिल चुकी है.
-भारत एक्सप्रेस
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