Supreme Court: ट्रांसजेंडर कानून से संबंधित दायर नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने दायर याचिका को नई याचिका के साथ टैग कर दिया है. यह याचिका महिला घोषणा अंतरराष्ट्रीय भारत संस्था की ओर से दायर की गई है.
दायर याचिका में ट्रांसजेंडर अधिकारों से संबंधित कानून के जैविक महिलाओं के लिए आरक्षित वैधानिक सुरक्षा और लाभों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की गई है, जिनमें महिलाओं के लिए आरक्षित, जेल आवास, खेल प्रतियोगिता और आपराधिक जांच के दौरान सुरक्षा उपाय शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि ट्रांसजेंडर अधिकारों से संबंधित दायर याचिका से यह याचिका अलग है. मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार संबंधित मामलों में अपनी प्रतिक्रिया में इन चिंताओं को दूर करने का प्रयास करेगा.
इससे पहले इसको लेकर दायर अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम में 2026 के संशोधन से पहले जिन लोगों को ट्रांसजेंडर पहचान कार्ड जारी किए गए थे, वे मान्य रहेंगे. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों चिंता व्यक्त किया था.
उसके बाद सरकार ने कोर्ट को यह भरोसा दिया था. कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर ले लिया था. सुप्रीम कोर्ट उन मामलों पर विचार करेगा, जिनमें तीजी कार्ड कथित तौर पर रद्द या अस्वीकार कर दिए गए हैं, और उन लोगों की स्थिति पर भी जिनके आवेदन लंबित थे. नए संशोधित बिल के मुताबिक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अब अपनी पहचान खुद तय करने का अधिकार नहीं होगा, ट्रांसजेंडर पहचान के लिए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आवश्यक होगी.
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ अपराधों के लिए सख्त सजा हो सकती है. ऐसे में खुद को ट्रांसजेंडर मानने वाले लाखों लोग इस कैटेगरी से बाहर हो जाएंगे. 2019 के एक्ट में यह प्रावधान था कि कोई भी शख्स अपनी इच्छा से खुद को ट्रांसजेंडर घोषित कर सकता था और उसके बाद उसे डीएम से सर्टिफिकेट मिल जाता है.
लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त हो गई है और मेडिकल टेस्ट कराना जरूरी कर दिया गया है. मेडिकल टेस्ट के बाद ही डीएम किसी को ट्रांसजेंडर का सर्टिफिकेट दे पाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने नालसा बनाम भारत संघ 2014 के केस में यह फैसला सुनाया था कि खुद की पहचान मौलिक अधिकार है.
कोई भी व्यक्ति यह तय कर सकता है कि वह पुरुष है, महिला है या फिर ट्रांसजेंडर है. इसके लिए किसी मेडिकल जांच की जरूरत नहीं है. साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कानून सेवा प्राधिकरण से जुड़े फैसले में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को मान्यता दी थी.
यह भी पढ़ें: सब भगवान भरोसे…11 हजार का इंजेक्शन 1.30 लाख में क्यों? केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
-भारत एक्सप्रेस
KN Nehru Supreme Court Plea: कैश फॉर जॉब मामले में आरोपी और तमिलनाडु के पूर्व…
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह…
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशनल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने बुधवार को वित्त वर्ष 27 की…
Supreme Court: पश्चिम बंगाल में साल 2021 में चुनावों के बाद हुई हिंसा के बाद…
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने 2027 की जनगणना में ओबीसी जातियों के लिए प्री-लोडेड ड्रॉपडाउन…
Adani Ports Share Price: अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने वित्त वर्ष…