पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के सत्यापन (SVR) की विशाल चुनौती को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समयबद्धता और शुद्धता सर्वोपरि है. 80 लाख लंबित मामलों के निपटारे के लिए अब न केवल सिविल जजों की मदद ली जाएगी, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी न्यायिक अधिकारियों को बुलाया जा सकेगा.
कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 22 फरवरी को जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर संसाधनों की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया था. वर्तमान में लगभग 250 जिला जज और अतिरिक्त जिला जज स्तर के अधिकारी 50 लाख दावों की जांच कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 80 लाख सत्यापन अभी बाकी हैं. यदि एक अधिकारी प्रतिदिन 250 मामलों का निपटारा करे, तब भी इस प्रक्रिया में कम से कम 80 दिन लगेंगे, जबकि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की समय सीमा 28 फरवरी 2026 निर्धारित है.
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की विशेष पीठ ने इस संकट के समाधान के लिए व्यापक निर्देश जारी किए हैं. न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अब आवश्यकतानुसार उन सिविल जजों को भी इस सत्यापन कार्य में नियुक्त कर सकते हैं, जिनके पास कम से कम 3 वर्ष का न्यायिक अनुभव है.
यदि इसके बाद भी अधिकारियों की संख्या पर्याप्त नहीं होती, तो पड़ोसी राज्यों, ओडिशा और झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से वर्तमान और पूर्व न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं मांगी जा सकती हैं. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य राज्यों से आने वाले इन अधिकारियों की यात्रा, आवास और भोजन से संबंधित सभी खर्चों का वहन चुनाव आयोग द्वारा किया जाएगा, ताकि 80 लाख मामलों का सत्यापन निर्धारित समय सीमा के भीतर सुचारू रूप से संपन्न हो सके.
ये भी पढ़ें- ₹40 हजार करोड़ का घपला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी की राहत वापस ली, अब फ्रॉड घोषित कर सकेंगे बैंक
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहचान के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड और अन्य सभी वैध सरकारी दस्तावेजों को स्वीकार किया जाएगा.
कट-ऑफ तिथि: 14 फरवरी 2026 से पहले इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक रूप से जमा किए गए सभी दस्तावेजों पर विचार करना अनिवार्य होगा.
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग किया. कोर्ट ने आदेश दिया कि “यदि 28 फरवरी 2026 तक सभी मामलों का सत्यापन पूरा नहीं हो पाता है, तो निर्वाचन आयोग उपलब्ध डेटा के आधार पर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर सकता है. इसके बाद, जो मामले लंबित रह जाएंगे, उनके आधार पर बाद में एक सप्लीमेंट्री (पूरक) सूची जारी की जाएगी.”
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 'भारत एक्सप्रेस' के पास पुलिस की आधिकारिक चार्जशीट…
Premanand Maharaj: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य की रहस्यमयी मौत हो गई.…
HC TAKES COGNIZANCE OF BUS FIRE: ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक निजी…
PM MODI HAILS ASIAN GAMES MEDALISTS: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 (आइची-नागोया) में…
Captain Amarinder Singh: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने…
उत्तर प्रदेश में 27 सितंबर तक भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका को…