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सुप्रीम कोर्ट से DDA को राहत: दिल्ली रिज इलाके में सड़क निर्माण और पेड़ काटने की मिली मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली के रिज इलाके में सड़क निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में डीडीए को राहत मिल गई है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने डीडीए को 0.79 हेक्टेयर रिज क्षेत्र में सड़क निर्माण करने की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने कहा कि सीएपीएफआईएमएस अस्पताल के लिए बेहतर संचालन के लिए वन भूमि के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. लेकिन कोर्ट ने पर्यावरण सुरक्षा के निर्देशों का पालन करने को कहा है.

कोर्ट ने कहा कि पेड़ों के पुनरोपण का काम 28 फरवरी तक पूरा करने को कहा है. कोर्ट ने एक्सपर्ट कमेटी को निगरानी करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने सड़क अर्धसैनिक बलों के लिए होने की बात कहते हुए उस पर रोक लगाने से इनकार किया है.

‘हम इसे नहीं रोकेंगे’

मामले की सुनवाई के दौरान डीडीए की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि 473 पेड़ो के जगह कम पेड़ काटें जाएंगे. हालांकि इसका विरोध करते हुए अन्य पक्षों ने कहा कि सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है, जिससे पर्यावरण पर ज्यादा असर पड़ सकता है. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि चाहे सड़क 50 मीटर चौड़ी ही क्यों न हो, हम इसे नही रोकेंगे, क्योंकि यह किसी निजी व्यक्ति के लिए नही बल्कि अर्धसैनिक बलों के लिए है.

किस बात का हो रहा है विरोध

डीडीए द्वारा दायर याचिका में यह भी कहा गया था कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तहत द्वारका के ढुलसिरस क्षेत्र में 3.68 हेक्टेयर गैर वन भूमि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए पहचान की गई है. इससे पहले सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए)द्वारा 2015 और 2021 के बीच 60000 से अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाया था. उनका कहना था कि पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और पेड़ों के संरक्षण के लिए कोई तंत्र नहीं है.

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क्या-क्या आरोप लगाए गए?

याचिकाकर्ता का यह भी आरोप था कि पेड़ों की कटाई के लिए फर्जी अनुमति जारी की गई है, विशेष रूप से आवासीय परियोजनाओं के लिए. वही वन अधिकारी ने अपने हलफनामे में कहा था कि पिछले साल 13 दिसंबर 2023 को उन्होंने वसंत कुंज पुलिस थाने के थाना प्रभारी को पत्र लिखा था, जिसमें इस मामले पर संज्ञान लेने और कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था. दायर हलफनामे में यह भी कहा गया था कि प्राथमिकी के तहत जांच कर रहे वसंत कुंज थाने के सहायक उपनिरीक्षक ने वन अधिकारी को जवाबी पत्र में लिखा कि कथित फर्जी अनुमति अपठनीय है.

गोपाल कृष्ण

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