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कानून की असली आत्मा उसकी इंसानियत में है: जस्टिस विक्रमनाथ

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ए के सेन मेमोरियल लेक्चर के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रमनाथ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर कहा कि नई तकनीकी आने वाले समय में काम के तरीके को बदल देगी. इसलिए भारतीय न्याय प्रणाली को इन चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा. उन्होंने कहा कि तकनीकी के इस दौर में भी न्यायिक संस्थाओं को निष्पक्षता, स्पष्टता और करुणा को केंद्र में रखना होगा.

कामों और जीवन के तरीके को बदल देगीं एआई

जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि आने वाले समय में कानूनी ढांचे को डेटा सुरक्षा, डिजिटल स्पेस में जिम्मेदार अभिव्यक्ति, बाजारों की निष्पक्षता, पर्यावरण संतुलन खासकर एआई जैसी उभरती तकनीकों से जुड़े जटिल प्रश्नों का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस नई तकनीक खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हमारे काम और जीवन के तरीके को बदल देगीं. हमें निष्पक्षता और इंसानियत को केंद्र में रखकर ही आगे बढ़ना होगा.

जस्टिस विक्रमनाथ ने आगे कहा कि कानून सिर्फ नियमों का सिस्टम नहीं, बल्कि लोगों के.साथ व्यवहार करने का तरीका है. उन्होंने कहा कि कानून एक वादा है कि ताकत तर्क के जवाबदेह होगी और तर्क साक्ष्य के लिए खुला रहेगा. तेजी से फैसले लेते हुए भी हमें न्याय और करुणा नहीं भूलनी चाहिए. जस्टिस विक्रमनाथ ने युवाओं का अनुशासन और विनम्रता का.मंत्र देते हुए कहा कि उनके करियर की असली नींव छोटे-छोटे रोजमर्रा के अनुशासन में है.

हारे तो सीखें, जीते तो धन्यवाद दें

जस्टिस विक्रमनाथ ने कहा कि युवा पेपर्स ध्यान से पढ़े, समय पर पहुचे, सम्मान से पेश आए, सीधी भाषा रखें. हारे तो सीखें, जीते तो धन्यवाद दें. ऐसे छोटे काम ही आपके चरित्र और प्रतिष्ठा को बनाते हैं. उन्होंने कहा कि बहस को देरी में बदलने न देना, स्पष्ट तर्क देना और साधारण भाषा में फैसले लिखना यही जनता के प्रति सम्मान का तरीका है. उन्होंने कहा कि संविधान सबके लिए बोलता है, इसलिए न्यायालयों के निर्णय भी सबके लिए सहज समझ में आने चाहिए.

उन्होंने आगे कहा कि बड़ा मंच ही नेतृत्व तय नही करता, बल्कि रोजमर्रा की छोटी कुशल आदतें वकीलों का असली प्रभाव बनाती हैं. उन्होंने कहा कि अपनी क्षमता का उपयोग संस्थान बनाने में करें, सिर्फ अपना नाम बनाने में करें. सिर्फ अपना नाम बनाने में नही. अपने प्रभाव का उपयोग न्याय को धार देने और नई पीढ़ी को दिशा देने में करें. उन्होंने यह भी कहा कि कानून की असली आत्मा उसकी इंसानियत में है और यह हर बदलाव में न्याय प्रणाली को स्थिर रखती हैं.

ये भी पढ़ें: ट्रांसजेंडर के अधिकारों पर हाईकोर्ट का अहम फैसला- शैक्षिक दस्तावेजों में नाम और लिंग बदलने से इनकार का आदेश किया रद्द

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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