Uttam Nagar murder case: दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में होली के दिन पानी का गुब्बारा फेंकने को लेकर शुरू हुए विवाद में 26 वर्षीय तरुण की हत्या के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच से कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है.
अदालत ने याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन और उनके वकील विष्णु शंकर जैन को सलाह दी है कि चूंकि दिल्ली हाई कोर्ट पहले से ही इस मामले से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है इसलिए उन्हें वहीं अपनी बात रखनी चाहिए. याचिका में पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने और उचित मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई थी, जिस पर अब हाई कोर्ट ही फैसला लेगा.
इस मामले (Uttam Nagar murder case) की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े सवाल पूछे हैं. कोर्ट के सामने यह बात आई थी कि इलाके में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा ‘ईद के दिन खून की होली खेलने’ जैसी भड़काऊ बातें कही गई थीं. इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए डीसीपी और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पुलिस ने इसे बेहद कुशलता से संभाला है. इलाके में मार्च की शुरुआत से ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती है और फिलहाल करीब 800 जवान चप्पे-चप्पे पर नजर बनाए हुए हैं ताकि शांति भंग न हो.
यह पूरा विवाद (Uttam Nagar murder case) होली के दिन तब शुरू हुआ जब एक लड़की ने कथित तौर पर दूसरे समुदाय की एक महिला पर पानी का गुब्बारा फेंक दिया था. मामूली कहासुनी ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और दोनों पक्षों के लोग सड़कों पर उतर आए. इस खूनी संघर्ष में 8 लोग घायल हुए थे, जिनमें 26 साल के तरुण को सिर में गंभीर चोटें आई थीं.
अस्पताल में इलाज के दौरान तरुण ने दम तोड़ दिया जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) को भी जोड़ दिया है. शुरुआत में इस मामले में धारा 110 और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई थी.
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कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के वकीलों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की अफवाह या हिंसा को रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं. पुलिस का तर्क है कि घटना के तुरंत बाद प्रभावी कदम उठाए गए और दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई है.
वहीं याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में कहा कि उनका मकसद दिल्ली पुलिस के मनोबल को कम करना नहीं है, बल्कि वे निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार की सुरक्षा चाहते हैं. फिलहाल, सबकी नजरें दिल्ली हाई कोर्ट पर टिकी हैं, जहाँ सुरक्षा और जांच की निगरानी को लेकर विस्तृत सुनवाई होनी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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