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आई-पैक निदेशक विनेश चंदेल को राहत: जांच में सहयोग और ईडी की सहमति के बाद मिली नियमित जमानत

आई-पैक के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने चंदेल को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि जमानत पर रहने के दौरान विनेश चंदेल गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और न ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेंगे. कोर्ट ने कहा कि चंदेल कोर्ट की बिना अनुमति के विदेश नहीं जाएंगे. कोर्ट ने चंदेल को पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा.

ईडी का रुख और जांच में सहयोग का हवाला

मामले की सुनवाई के दौरान ईडी ने जमानत का विरोध नहीं किया. जांच अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि विनेश चंदेल ने जांच में पूरा सहयोग किया है. उन्होंने जांच एजेंसी के साथ स्वेच्छा से जानकारी को साझा किया है, जिसके चलते ईडी ने जमानत का विरोध नहीं किया है. इससे पहले कोर्ट ने विनेश चंदेल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें अंतरिम जमानत की मांग की गई थी. कोर्ट ने कहा था कि चंदेल पर देश की वित्तीय व्यवस्था को प्रभावित करने वाले गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोप हैं. उनकी याचिका असाधारण मानवीय आधार पर तय सीमा को पूरा नहीं करती है.

एडिशनल सेशन जज की टिप्पणी और पिछली याचिका

एडिशनल सेशन जज शेफाली बरनाला टंडन ने कहा था कि यह स्थापित कानून है कि अंतरिम जमानत देना, विशेष रूप से धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपराधों में, एक सामान्य बात नहीं मानी जानी चाहिए और यह बाध्यकारी, तत्काल और असाधारण परिस्थितियों पर आधारित होनी चाहिए. चंदेल ने अपनी माँ की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के मानवीय आधार पर अंतरिम राहत का अनुरोध किया था. चंदेल को 13 अप्रैल को ईडी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था. विनेश चंदेल को ईडी ने पश्चिम बंगाल के कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है.

कोयला घोटाला मामला और आई-पैक की भूमिका

ईडी के मुताबिक यह मामला सिर्फ कोयले की अवैध तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पैसों के लेन-देन का जाल काफी बड़ा है. विनेश चंदेल आई-पैक कंपनी के फाउंडर, डायरेक्टर और 33 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले प्रमुख व्यक्ति हैं. ईडी का आरोप है कि कंपनी के जरिए करीब 50 करोड़ रुपए की संदिग्ध राशि को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से घुमाया गया है.

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आई-पैक जिसे प्रतीक जैन ने स्थापित किया था, 2021 से तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार को चुनावी संबंधी सेवाएं दे रही है. इस गिरफ्तारी के बाद राज्य में हलचल तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय ने 2 अप्रैल को इस मामले में दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई समेत कई स्थानों पर छापेमारी की थी. इनमें आई-पैक के एक अन्य सह-संस्थापक ऋषि राज सिंह, पूर्व आप संचार प्रभारी विजय नायर के ठिकाने भी शामिल थे.

गोपाल कृष्ण

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