Unipolar vs Bipolar Depression- bharat express
Unipolar vs Bipolar Depression: डिप्रेशन का नाम सुनते ही अक्सर उदासी, किसी काम में मन न लगना, लगातार थकान और नींद में बदलाव जैसे लक्षण सामने आते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति में डिप्रेशन एक जैसा नहीं होता. यूनिपोलर डिप्रेशन और बाइपोलर डिप्रेशन में डिप्रेसिव एपिसोड के दौरान कई लक्षण समान हो सकते हैं, इसलिए केवल मौजूदा लक्षणों के आधार पर दोनों के बीच अंतर करना मुश्किल होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, सही पहचान के लिए व्यक्ति की पूरी मूड हिस्ट्री समझना बेहद जरूरी है.
यूनिपोलर डिप्रेशन को आमतौर पर मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (MDD) के संदर्भ में समझा जाता है. इसमें व्यक्ति को एक या उससे अधिक मेजर डिप्रेसिव एपिसोड हो सकते हैं. इस दौरान लंबे समय तक मूड उदास रहना, रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि या आनंद कम होना और कामकाज प्रभावित होना प्रमुख लक्षण हो सकते हैं. मेजर डिप्रेसिव एपिसोड आमतौर पर कम से कम दो सप्ताह तक चलने वाली ऐसी अवधि होती है, जिसमें व्यक्ति लगातार उदासी या पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि और आनंद की कमी महसूस कर सकता है. इसके साथ निराशा, नींद में परेशानी, भूख में बदलाव और थकान जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. इसका असर व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के कामों पर भी पड़ सकता है.
बाइपोलर डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर के डिप्रेसिव फेज को कहा जाता है. इसमें व्यक्ति को डिप्रेशन के एपिसोड के साथ जीवन में कभी मेनिया या हाइपोमेनिया के एपिसोड भी हो सकते हैं. मेनिया या हाइपोमेनिया के दौरान मूड और व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दे सकते हैं. व्यक्ति की एनर्जी और एक्टिविटी अचानक बढ़ सकती है, नींद की जरूरत कम हो सकती है और विचार या बोलने की गति सामान्य से काफी तेज हो सकती है. हाइपोमेनिया मेनिया की तुलना में कम गंभीर हो सकता है, लेकिन इसमें भी मूड और एक्टिविटी लेवल में स्पष्ट बदलाव दिखाई देते हैं.
यूनिपोलर और बाइपोलर डिप्रेशन में डिप्रेसिव लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं. बड़ा अंतर व्यक्ति की पूरी मूड हिस्ट्री में छिपा होता है. यूनिपोलर डिप्रेशन में मुख्य रूप से डिप्रेसिव एपिसोड होते हैं, जबकि बाइपोलर डिसऑर्डर में डिप्रेशन के साथ मेनिया या हाइपोमेनिया के एपिसोड भी हो सकते हैं. इसलिए केवल उदासी, थकान या नींद में बदलाव जैसे लक्षण देखकर खुद से यह तय करना सही नहीं है कि व्यक्ति को कौन-सी समस्या है.
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ व्यक्ति के मौजूदा लक्षणों के साथ यह भी देखते हैं कि समस्या कब शुरू हुई, पहले मूड में किस तरह के बदलाव आए, परिवार में किसी को ऐसी समस्या रही है या नहीं और कौन-सी दवाएं ली जा रही हैं. इन सभी जानकारियों के आधार पर डॉक्टर स्थिति का आकलन करते हैं. खास तौर पर यदि डिप्रेशन के साथ कभी ऐसा दौर आया हो जब नींद की जरूरत बहुत कम हो गई हो, ऊर्जा असामान्य रूप से बढ़ गई हो, विचार बहुत तेजी से आने लगे हों या बोलने और गतिविधियों की गति बढ़ गई हो, तो इसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर देनी चाहिए.
यह भी पढ़ें: Flipkart और Amazon की सबसे बड़ी फेस्टिव सेल शुरू, iPhone से लेकर लैपटॉप-टीवी तक बंपर ऑफर्स
यदि उदासी, निराशा, रुचि की कमी, लगातार थकान या नींद में बदलाव कई दिनों या हफ्तों तक बना रहे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है. अगर किसी व्यक्ति को खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या से जुड़े विचार आ रहे हों, तो इसे गंभीर स्थिति मानकर तुरंत स्थानीय इमरजेंसी सेवा या किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मदद लेनी चाहिए. यूनिपोलर और बाइपोलर डिप्रेशन को समझने का सबसे अहम तरीका यही है कि केवल वर्तमान लक्षणों पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के पूरे मूड और व्यवहार की हिस्ट्री पर ध्यान दिया जाए. सही पहचान विस्तृत क्लीनिकल जांच के बाद ही संभव है.
भारत एक्सप्रेस
Cuba US Sanctions UN Vote: संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक…
MLC Election Results 2026 में यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 सीटों पर किसे…
Karva Chauth Vrat Katha: करवा चौथ पर सुहागिनें पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक…
करवा चौथ और त्योहारी सीजन के बीच सर्राफा बाजार में सोने के भाव में हल्की…
बिग बॉस 20 के घर में कैप्टेंसी टास्क के दौरान माहौल उस वक्त गरमा गया…
इजरायल के चुनाव में करीब 93 फीसदी वोटों की गिनती के बाद बेंजामिन नेतन्याहू का…