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दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा क्यों की जाती है और भगवान विष्णु की पूजा क्यों नहीं की जाती? जानिए क्यों?

Diwali 2025: दिवाली का पर्व पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इनकी पूजा करने से घर में धन, सुख और समृद्धि आती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा क्यों नहीं होती, जबकि लक्ष्मी जी उनकी पत्नी हैं?

दिवाली के पीछे की कहानी

दरअसल, इसके पीछे धार्मिक और पौराणिक कारण हैं. विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के दिन चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं. यह एकादशी आषाढ़ महीने में आती है और दिवाली का पर्व चातुर्मास के दौरान ही पड़ता है. इस समय भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, इसलिए दिवाली के दिन उनकी पूजा नहीं की जाती. दिवाली के 11 दिन बाद जब वे योगनिद्रा से जागते हैं, तब देवउठनी एकादशी मनाई जाती है.

माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा

अब बात करते हैं कि दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा साथ में क्यों की जाती है. एक कथा के अनुसार, एक बार माता लक्ष्मी को अपने सौंदर्य और लोकप्रियता पर अभिमान हो गया. जब भगवान विष्णु को यह पता चला तो उन्होंने कहा कि कोई भी स्त्री तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक वह मां न बने. यह सुनकर लक्ष्मी जी दुखी हो गईं.

गणेश जी को वरदान

तभी माता पार्वती ने उन्हें सांत्वना दी और गणेश जी को लक्ष्मी जी की गोद में बैठा दिया. उन्होंने कहा कि आज से गणेश जी आपके पुत्र कहलाएंगे. इसके बाद लक्ष्मी जी ने गणेश जी को वरदान दिया कि जो भी मेरी पूजा करेगा, उसे पहले तुम्हारी पूजा करनी होगी. तभी मेरी कृपा उस पर होगी.

दिवाली की पूजा परंपरा

इसलिए दिवाली के दिन सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है और फिर माता लक्ष्मी की. यह परंपरा आज भी हर घर में निभाई जाती है. भगवान विष्णु की पूजा इस दिन नहीं होती क्योंकि वे योगनिद्रा में होते हैं और लक्ष्मी जी अकेले धरती लोक पर भ्रमण करती हैं.

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इस तरह दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा न सिर्फ धार्मिक परंपरा है, बल्कि इसके पीछे गहरी पौराणिक मान्यता भी जुड़ी हुई है.

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-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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