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Freestyle Chess Grand Slam: 19 साल के प्रज्ञाननंदा ने चेस के नंबर 1 प्लेयर को मात्र 39 चालों में हराया, कार्लसन ने खुद ही मान ली हार

Freestyle Chess Grand Slam: भारत के स्टार चेस प्लेयर आर प्रज्ञाननंदा (R Praggnanandhaa) ने अमेरिका के लास वेगास में चेस में जबरदस्त परफॉर्म किया. फ्रीस्टाइल चेस ग्रैंड स्लैम टूर में शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रुप स्टेज के चौथे राउंड में प्रज्ञाननंदा ने दुनिया के नंबर एक चेस खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को मात्र 39 चालों में हरा दिया. 19 वर्षीय प्रज्ञाननंदा की इस जीत के साथ ही कार्लसन को तीनों बड़े फॉर्मेट, क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज, में हरा कर उपलब्धि हासिल की.

जैसे ही प्रज्ञाननंदा की जीत सुनिश्चित हुई कमेंटेटर ने कहा, “मैग्नस खुद ही हार मानने वाले हैं… और उन्होंने ऐसा ही किया (Magnus about to resign… and he does).”

10+10 टाइम कंट्रोल वाले इस टूर्नामेंट में प्रज्ञाननंदा ने नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव के खिलाफ ड्रॉ के साथ शुरुआत की, जिसके बाद उन्होंने बिबिसारा अस्सौबायेवा, विंसेंट कीमर और कार्लसन पर जीत हासिल की. 4.5 प्वाइंट के साथ वह अब ग्रुप व्हाइट में अब्दुसत्तोरोव और जावोखिर सिंडारोव के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर हैं.

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इस बीच, पेरिस और कार्लजूए में पिछले ग्रैंड स्लैम मुकाबलों में जीत हासिल करने के बावजूद, कार्लसन का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा. शुरुआती दो जीत के बाद, उन्हें प्रज्ञानंदा और वेस्ली सो से हार का सामना करना पड़ा और उसके बाद दो ड्रॉ रहे. अस्सौबायेवा पर अंतिम दौर की जीत से उन्हें केवल टाईब्रेकर मिला, जहां उन्हें लेवोन अरोनियन ने बाहर कर दिया.

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कार्लसन (Magnus Carlsen) अब “निचले ब्रैकेट में आ गए हैं, जहां से वह तीसरे स्थान से ऊपर नहीं आ सकते.”

कारुआना 6 ड्रॉ के साथ टॉप 4 में पहुंचे

ग्रुप ब्लैक में हिकारू नाकामुरा ने 6/7 के स्कोर के साथ दबदबा बनाया और हैंस नीमन, फैबियानो कारुआना और अर्जुन एरिगैसी के साथ नॉकआउट स्टोज में पहुंच गए. कारुआना, जिन्होंने अपनी पहली छह बाजियां ड्रॉ खेलीं, नीमन के खिलाफ जरूरी जीत के बाद टॉप चार में पहुंच गए.

व्यान लास वेगास में आयोजित फ्रीस्टाइल चेस टूर्नामेंट में आठ-खिलाड़ियों के दो राउंड-रॉबिन ग्रुप शामिल थे. प्रत्येक समूह से टॉप चार खिलाड़ी खिताबी मुकाबले में पहुंच गए, जबकि निचले चार खिलाड़ी प्लेसमेंट ब्रैकेट में चले गए. अब वे 2 लाख डॉलर वाले पुरस्कार की दौड़ में नहीं रहे. प्रज्ञाननंदा के नेतृत्व में भारत की उपस्थिति चेस फील्ड में लगातार बढ़ रही है.

-भारत एक्सप्रेस

Md Shadan Ayaz

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