खेल

सचिन-धोनी की तरह विंबलडन क्यों नहीं जाते पाकिस्तानी क्रिकेटर? भारतीय यूजर ने दिया मजेदार जवाब

इन दिनों टेनिस के सबसे प्रति त टूर्नामेंट ‘विंबलडन’ (Wimbledon) की धूम मची हुई है. खेल के मैदान के साथ-साथ यह टूर्नामेंट अपने ‘रॉयल बॉक्स’ और वहां सजने वाले सितारों के महफिल के लिए भी जाना जाता है. हाल ही में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर और युवा सनसनी शुभमन गिल लंदन के सेंटर कोर्ट में मैच का लुत्फ उठाते नजर आए. विराट कोहली, रोहित शर्मा और एमएस धोनी जैसे दिग्गज भी अक्सर यहां सूट-बूट में जलवे बिखेरते हैं. लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर एक सवाल ने नई बहस छेड़ दी है कि आखिर पाकिस्तानी क्रिकेटर कभी विंबलडन में क्यों नहीं दिखाई देते?

‘तेरी ही DP ही है जवाब’

दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पाकिस्तानी यूजर ने हैरान होते हुए पूछा, ‘बाकी देशों के खिलाड़ियों की तरह हमें विंबलडन में पाकिस्तानी क्रिकेटर क्यों नजर नहीं आते?’ इस सवाल पर भारत के पूर्व क्रिकेटर अजय जडेजा के नाम से बने एक पैरोडी अकाउंट ने ऐसा मजेदार जवाब दिया कि इंटरनेट पर हंसी का फव्वारा छूट पड़ा.

अकाउंट के एडमिन ने तंज कसते हुए लिखा, ‘तेरे सवाल का जवाब तो तेरी ही डीपी में छिपा है. जब उन्हें खुद उनके घर में ही कोई नहीं पूछता, तो विंबलडन तो बहुत दूर की बात है!’ मजेदार बात यह थी कि उस पाकिस्तानी यूजर ने अपनी प्रोफाइल पर खुद किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी की जगह न्यूजीलैंड के ब्रेंडन मैकुलम की फोटो लगा रखी थी.

विंबलडन से भारतीय क्रिकेटरों का पुराना याराना

भारतीय क्रिकेटर्स और विंबलडन का रिश्ता बेहद पुराना है. हाल ही में 10 जुलाई को सचिन तेंदुलकर अपनी पत्नी अंजलि और शुभमन गिल के साथ रॉयल बॉक्स की शोभा बढ़ाते दिखे थे. इससे पहले, टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद कप्तान रोहित शर्मा भी मैच देखने पहुंचे थे.

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की तस्वीरें तो पिछले साल खूब वायरल हुई थीं. वहीं कैप्टन कूल एमएस धोनी ने साल 2022 में अपने जन्मदिन से ठीक एक शाम पहले रफेल नडाल का क्वार्टर फाइनल मैच लाइव देखा था.

कैसे मिलती है रॉयल बॉक्स में एंट्री?

असल में, विंबलडन के रॉयल बॉक्स में एंट्री टिकट खरीदकर नहीं मिलती. वहां दुनिया की जानी-मानी हस्तियों को विंबलडन के आयोजकों (ऑर्गनाइजर्स) की तरफ से ‘स्पेशल इनविटेशन’ यानी वीआईपी आमंत्रण भेजा जाता है. भारतीय खिलाड़ियों के वैश्विक रूतबे और लोकप्रियता के कारण उन्हें यह सम्मान मिलता है, जो शायद पड़ोसी मुल्क के खिलाड़ियों को नसीब नहीं हो पाता.

ये भी पढ़ें:  लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम ने अंग्रेजों का घमंड तोड़ा, यास्तिका और क्रांति ने रचा इतिहास

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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