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‘द वॉइस ऑफ जस्टिस गवई स्पीक्स’ पुस्तक का 14 जुलाई को होगा विमोचन, उपराष्ट्रपति करेंगे लॉन्च

पूर्व सीजेआई द्वारा लिखी गई किताब ‘ द वॉइस ऑफ जस्टिस गवई स्पीक्स’ पुस्तक का भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी राधाकृष्णन 14 जुलाई को विमोचन करेंगे. यह पुस्तक कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (CLEA) की पहल पर प्रकाशित की गई है और इसका संपादन प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार ने किया है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत करेंगे. इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे. वहीं, पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी. आर. गवई कार्यक्रम में शामिल होंगे, जिनके भाषणों और न्यायिक विचारों को इस पुस्तक में संकलित किया गया है. पुस्तक में जस्टिस बी. आर. गवई के न्यायिक कार्यकाल के दौरान दिए गए महत्वपूर्ण भाषणों और संबोधनों को शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य संविधान, कानून के शासन, सामाजिक न्याय और न्याय तक समान पहुंच जैसे विषयों पर उनके विचारों को संरक्षित करना और व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है.

मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक सिद्धांतों के बीच संतुलन

यह पुस्तक भारतीय न्यायपालिका, संविधान तथा न्याय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर उनके दृष्टिकोण को सामने लाती है. पुस्तक में परिवर्तनकारी संवैधानिकता बदलते भारत मे न्यायपालिका की भूमिका, मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व, वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) और अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है. इसमें यह भी बताया गया है कि पूर्व सीजेआई गवई किस तरह मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित करने की वकालत करते हैं, ताकि संविधान के सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के उद्देश्य को प्रभावी बनाया जा सके.

यह संकलन कानून, न्याय वितरण, सामाजिक समावेशन और 21 वी सदी में न्याय में न्यायपालिका की बदलती भूमिका पर पूर्व सीजेआई गवई के विचारों को.समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है. पुस्तक विधि के छात्रों, शोधकर्ताओं, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और संवैधानिक लोकतंत्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री मानी जा रही है.

इस पुस्तक का प्रकाशन Thomson Reuters ने किया है. पुस्तक की प्रस्तावना सीजेआई सूर्यकांत ने लिखी है. इस समारोह में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, विधि शिक्षकों, शोधकर्ताओं और देशभर से जुड़े कई कानूनी विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है.

यह भी पढ़ें:  20 साल का इंतजार और सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; मुश्किल में फंसे इस नामी डेवलपर के डायरेक्टर

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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