Wimbledon 2026 Final Jannik Sinner: ऑल इंग्लैंड क्लब के ऐतिहासिक ग्रास कोर्ट पर रविवार की रात टेनिस इतिहास के सबसे रोमांचक और सांसें रोक देने वाले मुकाबलों में से एक की गवाह बनी. दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी इटली के जानिक सिनर ने अपनी बादशाहत को बरकरार रखते हुए विंबलडन 2026 के मेंस सिंगल्स का खिताब दोबारा अपने नाम कर लिया है. एक बेहद कड़े और मैराथन फाइनल मुकाबले में सिनर ने जर्मनी के धाकड़ खिलाड़ी एलेक्जेंडर ज्वेरेव को मात देकर अपने खिताब की सफल रक्षा की.
बता दें कि इस खिताबी जीत के साथ ही सिनर ने न सिर्फ ज्वेरेव के विंबलडन चैंपियन बनने के सपने को चकनाचूर कर दिया बल्कि जर्मनी के उस 35 साल पुराने सूखे को भी खत्म नहीं होने दिया जिसका इंतजार वहां के फैंस साल 1991 से कर रहे थे.
विंबलडन 2026 का यह फाइनल मुकाबला किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था. पूरे तीन घंटे और 46 मिनट तक चले इस महा-मुकाबले में दोनों ही खिलाड़ियों ने एक-एक अंक के लिए जान की बाजी लगा दी. जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने मैच की शुरुआत बेहद आक्रामक तरीके से की और पहले सेट को टाई-ब्रेकर में 7-6 (9-7) से जीतकर सिनर को बैकफुट पर धकेल दिया था. लेकिन इसके बाद कोर्ट पर नंबर वन खिलाड़ी जानिक सिनर का वो रौद्र रूप देखने को मिला जिसके लिए वे जाने जाते हैं.
सिनर ने पूरे मैच के दौरान 58 धमाकेदार विनर्स लगाए और अपनी गलतियों पर काबू रखते हुए सिर्फ 25 अनफोर्सड एरर किए. इसी दमदार खेल की बदौलत उन्होंने ज्वेरेव को अगले तीन सेटों में 7-6 (7-2), 6-3, 6-4 से धोकर मुकाबला अपने पाले में कर लिया.
जानिक सिनर के लिए यह जीत (Jannik Sinner beats Alexander Zverev) मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद खास और जरूरी थी. पिछले साल इसी कोर्ट पर विंबलडन का खिताब जीतने के बाद अगले 12 महीनों तक सिनर एक भी ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी नहीं उठा पाए थे. आलोचक लगातार उनकी फॉर्म और नंबर वन की रैंकिंग पर सवाल उठा रहे थे. लेकिन ऑल इंग्लैंड क्लब में कदम रखते ही सिनर ने साबित कर दिया कि घास के कोर्ट पर फिलहाल उनका कोई सानी नहीं है.
यह उनके करियर का पांचवां ग्रैंड स्लैम खिताब है और इसी के साथ वह इस मौजूदा सीजन में लगातार छठवां एटीपी टूर खिताब जीतने वाले इकलौते खिलाड़ी बन गए हैं. इस जीत ने टेनिस की दुनिया में सिनर के डोमिनेशन पर एक बार फिर पक्की मुहर लगा दी है.
दूसरी तरफ जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव के लिए यह हार किसी गहरे सदमे से कम नहीं है. ज्वेरेव इससे पहले नौ बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुके थे, लेकिन कभी भी क्वार्टर फाइनल की दहलीज पार नहीं कर पाए थे. इस साल फ्रेंच ओपन का खिताब जीतकर आए ज्वेरेव शानदार फॉर्म में थे और लगातार 13 मैच जीतकर फाइनल में पहुंचे थे.
उनकी कोशिश थी कि वह इतिहास रचते हुए साल 1991 में मिचेल स्टीच के बाद विंबलडन जीतने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी बनें. ज्वेरेव ने पहला सेट जीतकर उम्मीदें भी जगाई थीं, लेकिन सिनर के बेसलाइन गेम और जादुई रिटर्न के आगे जर्मनी का यह दिग्गज पूरी तरह बेबस नजर आया और इतिहास रचने से चूक गया.
इस पूरे विंबलडन टूर्नामेंट में जानिक सिनर का सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा था. टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में सर्बिया के मियोमिर केकमानोविच के खिलाफ वे हार के कगार पर पहुंच गए थे और उन्हें उस मैच को जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा था. स्पोर्ट्स एनालिस्ट्स का मानना है कि केकमानोविच के खिलाफ मिले उस कड़े संघर्ष ने ही सिनर को इस टूर्नामेंट के लिए मानसिक रूप से फौलाद बना दिया.
सिनर ने खुद माना कि उस मैच से उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और कोर्ट पर संयम रखना सीखा. उसी सीख का नतीजा (Jannik Sinner beats Alexander Zverev) रहा कि फाइनल में पहला सेट हारने के बावजूद इटली के इस स्टार ने पैनिक होने के बजाय ज्वेरेव के खेल को डिकोड किया और विंबलडन की ट्रॉफी दोबारा हवा में लहरा दी.
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-भारत एक्सप्रेस
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