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गेहूं-धान छोड़िए! अब इस फसल से होगी नोटों की बारिश, बिहार सरकार देगी ₹36,000 की भारी छूट

Bihar Bamboo Farming: धान, गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती से तो देश-विदेश के किसान लंबे समय से जुड़े चले आ रहे हैं, लेकिन अब वक्त बदल रहा है. किसानों की आमदनी को दोगुना करने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बिहार सरकार ने एक बहुत ही शानदार कदम उठाया है. सरकार अब ‘ग्रीन गोल्ड’ यानी बांस की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है. इस योजना के तहत सरकार की ओर से किसानों को प्रति हेक्टेयर 36,000 रुपये तक की आर्थिक मदद यानी सब्सिडी दी जा रही है. अगर आप भी खेती में कुछ नया और मुनाफा देने वाला करना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए एक सुनहरा मौका साबित हो सकती है. आइए जानते हैं कि इस स्कीम का फायदा किसे और कैसे मिल सकता है.

बिहार के इन 21 जिलों में लागू है योजना

सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना का दायरा पूरे राज्य में न होकर फिलहाल कुछ चुनिंदा जिलों तक सीमित किया गया है. कृषि विभाग के मुताबिक, सहरसा, सिवान, बांका, बेगूसराय, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर समेत कुल 21 चयनित जिलों में इसे प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है. इन जिलों के किसान इस योजना का सीधा लाभ उठाकर अपनी किस्मत बदल सकते हैं.

क्या हैं इस योजना की शर्तें और नियम?

हर सरकारी योजना की तरह बांस की खेती वाली इस ‘ग्रीन गोल्ड’ योजना के लिए भी कुछ नियम तय किए गए हैं:

जमीन की सीमा: इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास कम से कम 10 डिसमिल और अधिकतम 50 डिसमिल तक जमीन होनी चाहिए.

लीज पर जमीन: सबसे अच्छी बात यह है कि अगर आपके पास अपनी जमीन नहीं है, तो आप 5 साल की लीज पर भी जमीन लेकर इस योजना के तहत बांस की खेती कर सकते हैं और सब्सिडी पा सकते हैं.

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किसानों और कारीगरों के लिए विशेष ट्रेनिंग

सरकार सिर्फ किसानों को पैसे देकर ही नहीं छोड़ रही, बल्कि उन्हें खेती के वैज्ञानिक तरीकों से भी रूबरू करा रही है. इसके लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है. फील्ड इंचार्ज, प्रखंड उद्यान अधिकारियों, कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों को खास तौर पर ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे किसानों की सही तरीके से मदद कर सकें.

इतना ही नहीं, बांस से टोकरी, खूबसूरत सजावटी सामान और दूसरे प्रोडक्ट्स बनाने वाले स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को भी आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इससे वे बाजार की मांग के हिसाब से बेहतरीन सामान तैयार कर सकेंगे, जिससे न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी बल्कि रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे.

कैसे उठाएं योजना का लाभ?

अगर आप भी इस योजना से जुड़ना चाहते हैं और बांस की खेती कर अपनी कमाई बढ़ाना चाहते हैं, तो इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है. आप अपने नजदीकी कृषि विभाग या उद्यान कार्यालय में जाकर आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी सारी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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