उत्तर प्रदेश

अखिलेश यादव का ब्राम्हण कार्ड: कौन हैं पवन पांडे? जिन्हें आयोध्या से बनाया उम्मीदवार

Pawan Pandey Ayodhya: उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, राजनीतिक पार्टियों ने अपने गुणा-गणित को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है. ऐसा ही एक नजारा सूबे की राजधानी लखनऊ में बुधवार को देखने को मिली. जहां छोटे लोहिया के नाम से विख्यात समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर अखिलेश यादव ने एक नई चाल चली. सपा सुप्रीमो ने बीजेपी के कोर वोट बैंक माने जाने वाले ब्राह्मण समाज को अपनी तरफ करने के लिए अयोध्या से पवन पांडेय को उम्मीदवार बनाने का ऐलान कर दिया.

जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में पवन पांडेय ने मंच से यूपी की बीजेपी सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाई. अपने भाषण में उन्होंने यह बताया कि योगी के राज में ब्राह्मण समाज पर जुल्म हो रहा है. उन्होंने ब्राह्मण समाज से समाजवादी पार्टी को मजबूत करने की अपील कर डाली. आखिर पवन पांडेय कौन हैं जिन्हें आगे कर अखिलेश यादव ने ब्राह्मण कार्ड का दांव चला है?

लखनऊ के समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम से अखिलेश यादव ने ब्राह्मण समाज को साधते हुए अयोध्या विधानसभा सीट के लिए पवन पांडेय की जीत का ऐलान कर दिया. अखिलेश यादव ने कहा कि साल 2027 के विधानसभा चुनाव में पवन पांडेय अयोध्या सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज करने जा रहे हैं.

कौन हैं पवन पांडेय?

पवन पांडेय की गिनती समाजवादी पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में होती है. लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले पवन पांडेय अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में पवन पांडेय ने अयोध्या सदर सीट से बीजेपी के कद्दावर नेता लल्लू सिंह को हरा दिया था. इस जीत ने पवन पांडेय को समाजवादी पार्टी में स्थापित कर दिया और अखिलेश यादव ने उन्हें अपनी सरकार में राज्य मंत्री भी बनाया. हालांकि साल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में पवन पांडेय बीजेपी से हार गए थे, लेकिन वे लगातार अयोध्या में जमीनी राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहे.

अयोध्या चंदा चोरी में दिखे बेहद आक्रामक

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर अयोध्या देश-विदेश की राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है. वो पवन पांडेय ही थे जिन्होंने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के जमीन खरीद और चढ़ावा घोटाले का मुद्दा सबसे पहले उठाया था. वो लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेरते आ रहे हैं. पवन पांडेय की बेबाकी और इमानदारी की राजनीति ने उन्हें अखिलेश यादव की आंखों का तारा बना दिया. अब अखिलेश यादव ने उन्हें यूपी में ब्राह्मण समाज को एकजुट करने का काम सौंपा है.

ब्राह्मण वोटबैंक में लगेगी सेंध?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोटरों का रुझान निर्णायक माना जाता है. कहा जाता है कि जिस तरफ ब्राह्मण जाते हैं उसी तरफ सरकार बनती है. साल 2007 में ब्राह्मण वोटबैंक मायावती के साथ था, तो पहली बार बीएसपी ने खुद के दम पर सरकार बनाई. साल 2012 में ब्राह्मण समाज ने समाजवादी पार्टी की तरफ झुककर अखिलेश की सरकार बना दी.

अखिलेश यादव को पता है कि केवल पीडीए (पिछड़ा-दलित और अल्पसंख्यक) वोटबैंक के सहारे यूपी की सत्ता पर कब्जा कठिन है. ऐसे में उन्होंने अपनी नजर ब्राह्मण वोटबैंक की तरफ शिफ्ट कर दी है. लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम के मंच से अखिलेश यादव ने पीडीए में पीडी को पंडित बताया. पीडिए में पंडित के सहारे अखिलेश यादव यह संदेश देना चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी में सभी वर्गों को समान तरजीह दी जाती है.

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव की यह चौकड़ी बीजेपी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है. उन्होंने पूरे सूबे में ब्राह्मण समाज को साधने के लिए नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, बलिया सांसद सनातन पांडेय और अयोध्या के पवन पांडेय की तिकड़ी को जिम्मेदारी सौंपी है. अब देखना होगा कि बीजेपी इसकी काट कैसे निकालती है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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