उत्तर प्रदेश

आजम-अखिलेश की मुलाकात: रामपुर में दिखा खां साहब का ‘दबदबा’, अकेले मिलने पहुंचे सपा सुप्रीमो

Rampur Politics: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान की हालिया मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. रामपुर में हुई यह मुलाकात कई मायनों में महत्वपूर्ण रही, जिसने न केवल दोनों नेताओं के बीच के मौजूदा समीकरणों को उजागर किया, बल्कि सपा की भावी चुनावी रणनीति की दिशा भी तय कर दी. राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को ‘जज्बाती’ और ‘मजबूरी’ से भरा कदम बताया जा रहा है. पार्टी को संगठित रखने के लिए अखिलेश यादव के सामने आजम खान की नाराजगी दूर करना एक बड़ी चुनौती थी.

शर्त थी- बातचीत में ‘कोई नहीं हो तीसरा’

इस मुलाकात का सबसे अहम पहलू यह रहा कि अखिलेश यादव आजम खान से मिलने अकेले पहुंचे. सूत्रों के अनुसार, आजम खान की स्पष्ट शर्त थी कि उनके और अखिलेश के बीच की बातचीत में ‘कोई तीसरा नहीं हो’. अखिलेश यादव का अकेले आजम खान से मिलने जाना सीधे तौर पर रामपुर की राजनीति में आजम खान के दबदबे और प्रभाव को दर्शाता है. यह दर्शाता है कि पार्टी प्रमुख होने के बावजूद, अखिलेश को आजम खान की शर्तों को स्वीकार करना पड़ा, जो कहीं न कहीं यह संकेत देता है कि आजम खान अभी भी सपा के भीतर अपनी राजनीतिक हैसियत बरकरार रखे हुए हैं. इस दौरान, रामपुर से सपा के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी समेत कई अन्य पार्टी नेता भी आजम खान से दूरी बनाए रहे, जो राजनीतिक समीकरणों की नाजुकता को दर्शाता है.

जज्बाती मुलाकात: दोनों की मजबूरी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल व्यक्तिगत सद्भाव का विषय नहीं थी, बल्कि दोनों ओर राजनीतिक मजबूरी भी स्पष्ट थी. आजम खान कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव को आगामी चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए आजम खान के मुस्लिम वोट बैंक और उनके समर्थन की सख्त जरूरत है. आजम खान यूपी की राजनीति में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा चेहरा हैं और उनके बिना सपा की चुनावी रणनीति कमजोर पड़ सकती है. वहीं, आजम खान के लिए भी पार्टी से पूरी तरह अलग-थलग हो जाना उनके राजनीतिक भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता था. इस जज्बाती माहौल में हुई बातचीत ने पार्टी में चल रहे अंदरूनी मतभेदों को कम करने की कोशिश की है.

लेकिन फैसला तो रामपुर से ही होगा!

मुलाकात के बाद यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि भले ही पार्टी की कमान अखिलेश यादव के हाथ में हो, लेकिन रामपुर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े राजनीतिक फैसले अभी भी आजम खान की इच्छा के अनुसार ही लिए जाएँगे. यह तय माना जा रहा है कि रामपुर में प्रत्याशियों के चयन से लेकर पार्टी की रणनीति बनाने तक, अंतिम मुहर आजम खान की सहमति से ही लगेगी. यह मुलाकात सपा के लिए डैमेज कंट्रोल का एक महत्वपूर्ण प्रयास थी, जिसने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि पार्टी आगामी चुनावी चुनौतियों का एकजुट होकर सामना करे.

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Bharat Express Desk

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