MP Brijlal on Shivpal Yadav: लखनऊ/रवि कुमार: उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘संभल हिंसा’ और आजम खान के मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक पारा उबलने लगा है. समाजवादी पार्टी (SP) के दिग्गज नेता शिवपाल यादव के एक कथित बयान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हमलावर होने का बड़ा मौका दे दिया है. पूर्व डीजीपी और वर्तमान में बीजेपी के राज्यसभा सांसद बृजलाल (Brijlal) ने शिवपाल यादव के बयान पर बेहद तीखा पलटवार करते हुए सपा पर कानून से खिलवाड़ और तुष्टिकरण की राजनीति करने का ‘बम’ फोड़ा है.
बीजेपी सांसद बृजलाल ने दावा किया कि शिवपाल यादव कह रहे हैं कि अगर वे सत्ता में आए तो संभल हिंसा के सभी मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे. इतना ही नहीं, बृजलाल ने आरोप लगाया कि सपा नेताओं की तरफ से सजायाफ्ता आजम खान को जेल से निकालकर प्रदेश का गृह मंत्री बनाने तक की बात कही गई है. बृजलाल ने सपा की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनकी राजनीति में कानून से ऊपर हमेशा ‘व्यक्तिगत और पार्टी हित’ रहा है.
सपा पर निशाना साधते हुए बृजलाल ने इतिहास के पन्ने भी पलट दिए. उन्होंने 1978 के भयंकर संभल दंगों का जिक्र करते हुए बड़ा दावा किया कि उस दंगे में 184 हिंदुओं की निर्मम हत्या हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि जब 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार आई, तो उन्होंने उन दंगाइयों को बचाने के लिए सारे मुकदमे वापस ले लिए थे. इसी तर्ज पर आज 2024 की संभल हिंसा के मुकदमों को लेकर भी सपा वही पुराना खेल खेलना चाह रही है.
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सपा को ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का मास्टर बताते हुए बृजलाल ने अखिलेश यादव की पूर्व सरकार पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे अखिलेश सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान आतंकवाद से जुड़े 14 मामलों की चार्जशीट वापस लेने की खतरनाक कोशिश की थी, लेकिन तब माननीय कोर्ट ने इसकी अनुमति नहीं दी थी. बृजलाल ने साफ कहा कि समाजवादी पार्टी तुष्टिकरण और वोटबैंक के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है और वह हमेशा ‘कानून के राज’ से समझौता करती रही है. शिवपाल के बयान और बृजलाल के इस आक्रामक पलटवार ने यूपी के सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है.
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