उत्तर प्रदेश

‘अखिलेश के बिना सब सूना…’, आखिर कौन सा खेल खेल रहे हैं बृजभूषण शरण सिंह?

Brij Bhushan Sharan Singh: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ बयान ऐसे होते हैं, जो शब्दों से ज्यादा संकेतों की वजह से चर्चा में आते हैं. बीजेपी के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का ताजा बयान ऐसा ही इशारा कर रहा है. उन्होंने कहा- ‘अखिलेश के बिना सब सूना’. इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा छिड़ गई है कि आखिर बृजभूषण क्या संदेश देना चाहते हैं.

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन सियासी तापमान बढ़ना शुरू हो चुका है. लंबे समय तक अपेक्षाकृत शांत रहने वाले नेता भी अब खुलकर बोल रहे हैं. ऐसे माहौल में जब बृजभूषण जैसे प्रभावशाली नेता विपक्ष के बड़े चेहरे की तारीफ करते नजर आते हैं, तो राजनीतिक चर्चाओं का तेज होना स्वाभाविक है.

कोर्ट से राहत के बाद और मुखर दिख रहे बृजभूषण

हाल ही में चर्चित मामले में अदालत से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों का उत्साह बढ़ा हुआ है. देवीपाटन मंडल में उनके कार्यक्रमों और बयानों की चर्चा लगातार हो रही है.

यही वजह है कि उनके हर बयान को बड़े सियासी संदर्भ के रूप में देखा जा रहा है. बृजभूषण शरण सिंह ने हाल ही में बाबा रामदेव पर तीखे हमले किये थे और उनको नकली खाद्य पदार्थ बनाने वालों का राजा घोषित किया था. हालांकि उनकी अखिलेश यादव के प्रति नरमी बड़े सियासी संकेत के रूप में देखी जा रही है.

देवीपाटन से अवध तक असर रखने वाले नेता

बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ एक लोकसभा सीट तक सीमित नहीं माना जाता. गोंडा उनका राजनीतिक केंद्र रहा है. कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र से वह कई बार सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में उनके पुत्र करण भूषण सिंह इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.

गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती के इलाकों में उनका मजबूत संगठनात्मक और सामाजिक नेटवर्क माना जाता है. राम मंदिर आंदोलन से जुड़ाव और वर्षों की राजनीतिक सक्रियता के कारण अवध और आसपास के कई क्षेत्रों में भी उनकी पहचान बनी हुई है. इसी वजह से उनके किसी भी बयान को हल्के में नहीं लिया जा रहा है.

मुलायम सिंह यादव से पुराने रिश्तों की चर्चा क्यों?

बृजभूषण शरण सिंह और मुलायम सिंह यादव के रिश्तों की चर्चा राजनीति में नई नहीं है. दोनों कुश्ती और अखाड़े की दुनिया से जुड़े रहे. इसलिए अलग-अलग दलों में रहने के बावजूद दोनों के बीच व्यक्तिगत स्तर पर सम्मान का रिश्ता बना रहा. बृजभूषण सिंह कई मौकों पर इसे खुद दोहरा चुके हैं.

अखिलेश के साथ रिश्तों में कभी नहीं दिखी तल्खी

अखिलेश यादव और बृजभूषण शरण सिंह के बीच भी सार्वजनिक स्तर पर तीखी राजनीतिक टकराहट कम ही देखने को मिली है. महिला पहलवानों के आंदोलन के दौरान भी अखिलेश यादव ने व्यक्तिगत टिप्पणियों से दूरी बनाई थी और मामले को कानूनी प्रक्रिया से जोड़कर देखा था.

दूसरी तरफ बृजभूषण भी कई मौकों पर अखिलेश यादव के प्रशासनिक अनुभवों की सराहना कर चुके हैं. उनका ताजा बयान भी इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है.

सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड करते हैं बृजभूषण?

बृजभूषण शरण सिंह की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान उनकी बेबाकी मानी जाती है. वह अक्सर ऐसे बयान देते हैं, जो सीधे सुर्खियों में आ जाते हैं.

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गोंडा-कैसरगंज क्षेत्र में उनके कार्यक्रम, अखाड़ों से जुड़ाव, समर्थकों की बड़ी मौजूदगी और आक्रामक राजनीतिक अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होता है. यही कारण है कि उनकी हर नई टिप्पणी को लोग अलग-अलग राजनीतिक नजरिये से देखने लगते हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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