उत्तर प्रदेश

जाट-मुस्लिम से जाट-ब्राह्मण की ओर… जयंत चौधरी ने क्यों बदली आरएलडी की चाल, जानिए इनसाइड स्टोरी

RLD Jat Brahman Strategy: साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति नई करवट लेते दिखाई दे रही है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट-मुस्लिम एकता की वजह से बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभार लेने वाली राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) की सियासी चाल अब बदलती दिखाई दे रही है. चौधरी चरण सिंह से लेकर चौधरी अजीत सिंह तक सभी ने किसान, जाट और मुस्लिम की पार्टी के तौर पर आरएलडी को पहचान दी थी. अब इस पार्टी पर बीजेपी के संगत का असर दिखने लगा है.

वर्तमान में आरएलडी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अनुपम मिश्रा को आरएलडी का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है. उससे पहले केसी त्यागी को संसदीय दल का अध्यक्ष नियुक्त किया था. इसके अलावा उन्होंने त्रिलोक त्यागी को जेडीयू संगठन का राष्ट्रीय महासचिव बनाया है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी ने पार्टी में मुस्लिम नेताओं की जगह ब्राह्मण समाज से आने वाले नेताओं को तरजीह देनी शुरू कर दी है. इस समय संगठन में सबसे ऊपर मौजूद नेताओं में ब्राह्मण समाज की बड़ी हिस्सेदारी हो गई है. आरएलडी की अचानक बदली चाल को राजनीतिक विश्लेषक अलग नजरिये से देख रहे हैं. उनका मानना है कि जयंत चौधरी आरएलडी की पहचान सिर्फ जाटों की पार्टी के तौर पर नहीं बल्कि सर्व समाज की पार्टी बनाना चाहते हैं. संगठन में ब्राह्मण समाज को तवज्जो देना उसी बात की ओर इशारा करता है.

मुजफ्फरनगर दंगों के बाद बदल गया पश्चिमी यूपी का माहौल

साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद पश्चिमी यूपी में जो जाट और मुस्लिम पारंपरिक रूप से आरएलडी के वोटर थे, वो एक-दूसरे के दुश्मन बन गए. जाटों ने आरोप लगाया कि इस दंगे की वजह से पीड़ित परिवारों के साथ आरएलडी नेतृत्व ने उस तरह से साथ नहीं दिया जैसे बीजेपी ने दिया. इसका खामियाजा आरएलडी को साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ा.

साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान RLD ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर जाट-मुस्लिम एकता को फिर से जीवित करने की कोशिश की, लेकिन नतीजे वैसे नहीं रहे. इसके बाद उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया. जयंत चौधरी का यह कदम उनकी राजनीतिक करियर को जैसे पंख लगा दिया.

जाट-ब्राह्मण गठबंधन से नई ताकत बनी आरएलडी

बीजेपी के साथ गठबंधन से हुए फायदे को जयंत चौधरी और आगे भुनाना चाहते हैं. इस वजह से अब वो पार्टी के अंदर ब्राह्मण और सवर्ण समाज को तवज्जो देने लगे हैं. उन्होंने रामाशीष राय को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बैठाया है, जो भूमिहार-त्यागी समाज से आते हैं. इसके अलावा अनुपम मिश्रा को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है. इस तरह से जयंत चौधरी आरएलडी को जाट-मुस्लिम की जगह जाट-ब्राह्मणों की पार्टी के रूप में नई पहचान देने में जुटे हुए हैं.

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जयंत चौधरी की बीजेपी से दोस्ती का असर अब पार्टी के अंदर भी दिखाई दे रही है. आरएलडी के नेता और विधायक अपने भाषणों में बीजेपी के कदम पर चलते हुए हार्डकोर हिंदुत्व की पीच पर खेल रहे हैं. सियासी जानकारों का मानना है कि जयंत चौधरी का यह कदम आरएलडी को पश्चिमी यूपी से निकालकर पूरे प्रदेश में नई पहचान बनाने में मदद करेगी.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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