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Delhi-NCR Weather: आज देशभर में सुहागिनें करवा चौथ का व्रत रख रही हैं और रात को चंद्रमा के दर्शन के बाद अपना व्रत खोलेंगी. लेकिन इस बार दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में खराब मौसम और बादलों के कारण महिलाओं को चांद के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
करवा चौथ के दिन दिल्ली-एनसीआर में बारिश और काले बादलों के छाए रहने के कारण चांद देर से निकल सकता है. मौसम विभाग के अनुसार चक्रवाती असर से मौसम बदला हुआ है. इस लेख में पूजा के शुभ मुहूर्त, व्रत के नियमों और चांद निकलने के संभावित समय की पूरी जानकारी दी गई है.
देश के कई बड़े शहरों में इस बार करवा चौथ पर चांद सुहागिनों को लंबा इंतजार करवा सकता है. दिल्ली-एनसीआर में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है.मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया है. 29 अक्टूबर की सुबह कई जगहों पर तेज बारिश हुई और अभी भी आसमान में काले बादलों का साया मंडरा रहा है.अगर मौसम का हाल यही रहा तो करवा चौथ का चांद बादलों में देर तक छिपा रहने की आशंका है.
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान की वजह से दिल्ली से सटे इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और काले बादल मंडराने की संभावना जताई गई है. यदि शाम के समय भी मौसम का हाल ऐसा ही रहा तो दिल्ली से सटे गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और मेरठ में भी चांद देर से दिखाई दे सकता है. इसलिए इन इलाकों में रहने वाली महिलाओं को स्थानीय मौसम पर भी नजर रखनी होगी.
राजधानी दिल्ली सहित 29 अक्टूबर को करवा चौथ के दिन चंद्रमा रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर निकल सकता है. हालांकि भौगोलिक विषमता के कारण देश के सभी राज्यों और बड़े शहरों में चांद निकलने का समय एक दूसरे से अलग रहता है. कई बार चांद समय पर निकल जाता है, लेकिन बादलों में छिपे रहने की वजह से दिखाई ही नहीं पड़ता है.
करवा चौथ की पूजा के लिए शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक श्रेष्ठ मुहूर्त बताया गया है. इस अवधि में महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा कर सकती हैं. पूजन के दौरान करवा चौथ की कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा भी है. पूजा का समय तय करने से पहले अपने शहर के पंचांग में दिए गए मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा.
करवा चौथ के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और अपनी श्रद्धा के अनुसार निर्जला व्रत का संकल्प लें. घर की उत्तर या पूर्व दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी और माता गौरी को स्थापित करें. रोली, मौली, चावल और धूप-दीप से पूजा करने के बाद माता गौरी को शृंगार सामग्री अर्पित करें. पूजा में एक करवे में गेहूं और ढक्कन परूरा या मिठाई रखें. रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य दें और पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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