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डिजिटल अरेस्ट नहीं, ये सीधे ‘डिजिटल डकैती’ है… सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, आरोपियों को राहत देने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट को लेकर दायर याचिका को खारिज करते हुए बड़ी टिप्पणी की है.इससे एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर साइबर अपराध को ‘डिजिटल डकैती’ करार दिया है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध में शामिल लोगों और गिरोह से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, ये एक बेरहम अपराधी की तरह है.

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जबरन वसूली तो सबसे साधारण अपराध है. हमारी राय में डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए की गई ठगी ‘डिजिटल डकैती’ है. कोर्ट ने कहा ऐसे लोगों को कोई न्याय मंच देने का.सवाल ही नही उठता. जिसको वीडियो कॉल के जरिए अंजाम दिया जाता है.

कोर्ट ने यह टिप्पणी 12 राज्यों में लंबित 30 से अधिक मामलों को एक साथ जोड़ने की मांग की याचिका को खारिज करते हुए कहा. यह याचिका गौरव कुमार साहा और निधि भंडारी की ओर से दायर की गई थी. इन.दोनों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनी के खाते का इस्तेमाल विभिन्न अपराधों को अंजाम देने के लिए म्यूल खाते के रूप में करने दिया.

CJI सूर्यकांत ने म्यूल खातों के जरिए धोखाधड़ी पर जताई चिंता

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि केरलम के एर्नाकुलम के 81 वर्षीय व्यक्ति से 1.90 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई और उनकी रकम आपके म्यूल खाते में जमा की गई. म्यूल खाता ऐसा बैंक खाता है, जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड के पैसे को ट्रांसफर करने या छिपाने के लिए करते है.

कोर्ट ने दोनों आरोपियों की याचिका को खारिज करते हुए यह भी कहा कि इन्हें सजा देते समय भी उतनी ही सख्ती बरती जानी चाहिए. अगर कानून में ट्रायल से पहले ही सजा देने की कोई गुंजाइश है, तो उसका भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए. दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध से संबंधित 35 आपराधिक मामले दिल्ली, महाराष्ट्र, केरलम, तेलंगाना, गुजरात सहित अन्य राज्यों में दर्ज है.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अन्य याचिका पर अपने फैसले में कहा था कि डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं खासकर बुजुर्ग नागरिकों को निशाना बनाने वाली घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इनके समाज पर दूरगामी परिणाम होते है. कोर्ट ने कहा था इन मामलों से बहुत ज्यादा संवेदनशीलता और एक अलग नजरिए के साथ निपटना होगा.क्योंकि ये अपराध न केवल जनता के भरोसे और विश्वास को तोड़ते हैं, बल्कि पूरे समाज पर बुरा असर डालते हैं.

कोर्ट ने आरोपियों की ओर से पेश वकील की उस दलीलों को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कुछ आरोपियों की भूमिका सीमित थी. कोर्ट ने कहा था, जटिल साइबर धोखाधड़ी के मामलों में साजिश को अंजाम देने में हर भागीदार की अहम भूमिका होती है.

गोपाल कृष्ण

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