उत्तर प्रदेश

रिश्वत कांड: तबादले को एक साल पूरे फिर भी पुरानी सीट पर जमा रहा कर्मचारी, अफसरों ने साधी चुप्पी

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सरकारी सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक ढुलमुल रवैए का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां स्वार विकास खंड कार्यालय में तैनात एक बाबू का करीब एक साल पहले ही ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी पुरानी सीट नहीं छोड़ी है. जनाब आज भी उसी पुराने दफ्तर में बैठकर सारा कामकाज संभाल रहे हैं. सबसे अजीब बात ये है कि इस पूरे मामले से जिले के उच्च अधिकारी पूरी तरह बेखबर होने का दावा कर रहे हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

2024 में रिश्वत लेते वीडियो हुआ था वायरल

ये पूरा मामला स्वार ब्लॉक कार्यालय में तैनात उर्दू अनुवादक सह कनिष्ठ सहायक (जूनियर असिस्टेंट) यूनुस अली से जुड़ा है. यूनुस अली पहले भी विवादों में घिरे रहे हैं. साल 2024 में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था, जिसमें उन पर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में कथित रूप से 200 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था. वीडियो के आधार पर कड़ा संज्ञान लेते हुए विभाग ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था. हालांकि, बाद में विभागीय प्रक्रिया के तहत उनकी बहाली हो गई और उन्हें दोबारा सेवा में ले लिया गया.

तबादला आदेश के बाद भी नहीं हुए कार्यमुक्त

विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ. निलंबन से बहाली के बाद, पिछले साल 16 अप्रैल 2025 को विभाग ने यूनुस अली का तबादला स्वार ब्लॉक से हटाकर दूसरे विकास खंड में कर दिया था. सरकारी नियमों के मुताबिक ट्रांसफर ऑर्डर आने के तुरंत बाद कर्मचारी को नए दफ्तर के लिए कार्यमुक्त हो जाना चाहिए. लेकिन इस मामले में आदेश जारी हुए एक साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है और यूनुस अली अब भी स्वार ब्लॉक में ही जमे हुए हैं. सूत्रों का आरोप है कि विकास खंड अधिकारी (BDO) ने तबादला आदेश आने के बाद भी उन्हें नए तैनाती स्थल पर भेजने के बजाय अपने ही कार्यालय में रोके रखा.

अब इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों के बीच तीखी चर्चा शुरू हो गई है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसकी शह या संरक्षण के चलते एक कर्मचारी ट्रांसफर होने के बाद भी अपनी पुरानी सीट पर कुंडली मारकर बैठा हुआ है? स्थानीय ग्रामीणों ने अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि इस प्रशासनिक लापरवाही के पीछे के असली कारणों का पता चल सके.

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-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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