Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) जिले के गंगोह थाना क्षेत्र में एक ऐसी घटना घटी, जो न केवल पुलिस (UP Police) की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि मानवता की अनकही कहानी भी बयां करती है. विधवा सोमती देवी, जो मजदूरी कर चार बेटियों का पेट पालती हैं, अपनी चौथी बेटी की शादी की चिंता में डूब गई थीं.
पति के निधन के बाद आर्थिक तंगी ने उनके जीवन को और कठिन बना दिया था. तीन बेटियों की शादियां तो हो चुकी थीं, लेकिन चौथी का विवाह एक बोझ बन गया. सोमती ने हिम्मत जुटाई और थाने की महिला हेल्प डेस्क पर पहुंचकर थानाध्यक्ष पीयूष दीक्षित को अपनी व्यथा सुनाई.
थानाध्यक्ष ने न केवल उनकी बात सुनी, बल्कि पूरा भरोसा दिलाया कि शादी की हर जिम्मेदारी वे खुद निभाएंगे. यह वादा मात्र शब्दों तक सीमित न रहा, बल्कि अमल में बदल गया.
परिवार ने बेटी का रिश्ता संसारपुर गांव के सोनू कुमार से तय किया और शुभ मुहूर्त 27 नवंबर 2025 को रखा. गंगोह थाना पुलिस ने कमान संभाली और शादी की सारी व्यवस्थाएं संवार दीं. दहेज का सामान, गृहस्थी की चीजें, भोजन की दावत, मंडप की सजावट—सब कुछ पुलिस ने ही जुटाया. थानाध्यक्ष पीयूष दीक्षित के नेतृत्व में टीम ने हर छोटी-बड़ी तैयारी पर नजर रखी, ताकि कोई कमी न रहे. न केवल वित्तीय सहायता दी गई, बल्कि आयोजन की पूरी निगरानी भी की गई.
सोमती देवी ने बताया, “मेरा नाम सोमती है. मैं बहुत गरीब हूं. पति की मौत के बाद घर मजदूरी से चलता है. बेटी की शादी कैसे करूंगी, यही चिंता थी. पुलिस ने मेरी बात सुनी, पूरा खर्च उठाया, दहेज दिया. यह एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगी.” उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर राहत की मुस्कान.
शादी के दिन का नजारा देखने लायक था. मंडप सजा, बारात आई और विधि-विधान से विवाह संपन्न हुआ. सबसे मार्मिक पल तब आया जब थानाध्यक्ष पीयूष दीक्षित स्वयं धर्म पिता बनकर मंडप में पहुंचे और कन्यादान किया. यह दृश्य देखकर उपस्थित सभी लोग भावुक हो उठे. सोमती देवी की बेटी का हाथ सोनू कुमार के हाथ में सौंपते हुए थानाध्यक्ष ने कहा कि यह उनका कर्तव्य है. एसपी देहात सागर जैन ने इस प्रयास की सराहना की. उन्होंने बताया कि सोमती कुछ दिन पहले हेल्प डेस्क पर आई थीं.
थानाध्यक्ष और टीम ने मानवता के आधार पर सब कुछ संभाला. उन्होंने कहा, “यह न केवल एक परिवार की मदद है, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश भी देता है कि पुलिस कानून के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाती है.”
यह घटना साबित करती है कि वर्दी में सख्ती के साथ संवेदना भी बसी होती है. गरीबी और सामाजिक बाधाओं के बीच पुलिस का यह कदम नई उम्मीद जगाता है. परिवार ने पुलिस को धन्यवाद दिया और कहा कि यह जीवन का टर्निंग पॉइंट है. सहारनपुर पुलिस की यह मिसाल अन्य जिलों के लिए भी सीख बनेगी.
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