उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के 14 सियासी अफसर: सत्ता की सवारी में 100% सफलता, अपनी पार्टी वाले पूरे फेल; पढ़ें 12 साल की रिपोर्ट

UP Bureaucrats in Politics: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर नौकरशाही और सत्ता के गलियारों के बीच का फासला मिटता दिख रहा है. 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही प्रशासनिक कुर्सी वाले चुनावी दंगल में उतरने की तैयारी में हैं. चर्चा है कि 2 IAS और 2 PCS अधिकारी पहली बार 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि जब एक आईएएस या आईपीएस अधिकारी अपनी नौकरी, रुतबा और लालबत्ती छोड़कर खादी का दामन थामता है, तो जनता की अदालत में उसका सक्सेस रेट क्या रहता है?

बीते 12 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व नौकरशाहों का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला रहा है. इस दौरान 14 वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने राजनीति का रुख किया, लेकिन चुनावी कामयाबी केवल उन्हीं के हिस्से आई जिन्होंने सत्ताधारी दलों का झंडा थामा. वहीं नई पार्टी बनाने वाले एक अदद जीत के लिए तरसते रह गए.

12 साल का सियासी हिसाब-किताब

  • सत्ता की सवारी और 100% सफलता: 6 अफसर सत्ताधारी दल (भाजपा/कांग्रेस) में शामिल होकर सीधे सांसद, विधायक और मंत्री बने
  • पार्टी बनाकर ठंडे बस्ते में जाने वाले: 4 अफसर बड़े-बड़े वादों के साथ राजनीतिक दल का गठन तो किया, लेकिन खुद कभी सीधे चुनाव नहीं लड़ सके.
  • मैदान में उतरे पर बुरी तरह हारे: 4 अफसर अपनी पार्टी या निर्दलीय लड़े और कुछ को तो कुल वोटों का 1% भी नसीब नहीं हुआ.

जिन्होंने सत्ता का दामन थामा और सीधे बने मंत्री-सांसद

1. अरविंद कुमार शर्मा (1988 बैच IAS)

गुजरात कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा प्रशासनिक गलियारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं. 2001 से 2014 तक गुजरात सीएमओ और फिर 2014 से पीएमओ में शीर्ष जिम्मेदारियां संभालने के बाद उन्होंने 2021 में वीआरएस ले लिया. 2022 में बीजेपी ने उन्हें यूपी विधान परिषद (MLC) भेजा और सीधे ऊर्जा एवं नगर विकास जैसे भारी-भरकम विभागों का कैबिनेट मंत्री बना दिया.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: सचिव एमएसएमई (भारत सरकार), संयुक्त सचिव पीएमओ, डीएम मेहसाणा.
  • राजनीतिक स्थिति: वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री; 2027 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने की प्रबल चर्चा.

2. असीम अरुण (1994 बैच IPS)

1994 बैच के आईपीएस अधिकारी असीम अरुण का राजनीति में आना किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रहा. वे प्रधानमंत्री की सुरक्षा वाली एसपीजी (SPG) क्लोज प्रोटेक्शन टीम में रहे, यूपी डायल-112 के एडीजी रहे और कानपुर के पहले पुलिस कमिश्नर बने. जनवरी 2022 में उन्होंने वीआरएस लिया और महज दो महीने के भीतर मार्च 2022 में कन्नौज सदर सीट से भाजपा विधायक बनकर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की कुर्सी संभाल ली.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: पहला पुलिस कमिश्नर कानपुर, एडीजी डायल-112, एसपीजी कमांडो हेड.
  • राजनीतिक स्थिति: वर्तमान में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); 2027 में कन्नौज से दोबारा उतरने की तैयारी.

3. राजेश्वर सिंह (1994 बैच PPS / प्रमोटेड IPS)

आईआईटी धनबाद से पढ़े राजेश्वर सिंह का नाम देश के सबसे हाई-प्रोफाइल जांच अधिकारियों में शामिल रहा है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के संयुक्त निदेशक के पद पर रहते हुए उन्होंने 2G स्पेक्ट्रम, अगस्ता वेस्टलैंड, आम्रपाली और गोमती रिवरफ्रंट जैसे चर्चित घोटालों की जांच की. नौकरी के 11 साल बाकी रहते हुए फरवरी 2022 में उन्होंने वीआरएस लिया और भाजपा के टिकट पर लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से भारी मतों से जीतकर विधायक बने.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: संयुक्त निदेशक (प्रवर्तन निदेशालय – ED), डिप्टी एसपी यूपी पुलिस.
  • राजनीतिक स्थिति: लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से भाजपा विधायक; 2027 में सीट के मुख्य दावेदार.

4. सत्यपाल सिंह (1980 बैच IPS)

बागपत के रहने वाले सत्यपाल सिंह मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद पर तैनात थे, जब उन्होंने 59 साल की उम्र में इस्तीफा देकर राजनीति का रुख किया. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें गृह क्षेत्र बागपत से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह के खिलाफ उतारा, जहां उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की. 2017 में वे केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री बने और 2019 में दोबारा सांसद चुने गए.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: पुलिस कमिश्नर मुंबई, संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम).
  • राजनीतिक स्थिति: दो बार के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री.

5. बृजलाल (1977 बैच IPS)

मायावती सरकार के सबसे ताकतवर पुलिस अधिकारी रहे 1977 बैच के आईपीएस बृजलाल 2011 में यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) बने. 2015 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली. पार्टी ने पहले उन्हें यूपी अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग का अध्यक्ष बनाया और फिर 2020 में राज्यसभा सांसद बनाकर संसद के उच्च सदन भेज दिया.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: डीजीपी उत्तर प्रदेश, एडीजी (कानून-व्यवस्था).
  • राजनीतिक स्थिति: पूर्व राज्यसभा सांसद (भाजपा); दलित समुदाय में पार्टी का बड़ा चेहरा.

6. पीएल पुनिया (1970 बैच IAS)

पन्ना लाल पुनिया (पीएल पुनिया) ने 1970 बैच के आईएएस के रूप में यूपी में मुलायम सिंह यादव और मायावती दोनों के कार्यकाल में प्रमुख सचिव के अहम पद संभाले. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा और 2009 में बाराबंकी सुरक्षित सीट से लोकसभा सांसद बने. 2014 में हार के बाद कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा. अब उनके बेटे तनुज पुनिया बाराबंकी से कांग्रेस सांसद हैं.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव, वरिष्ठ आईएएस यूपी कैडर.
  • राजनीतिक स्थिति: पूर्व लोकसभा व राज्यसभा सांसद, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (एससी आयोग).

जिन्होंने अपनी पार्टी तो बनाई, पर खुद चुनावी समर से रहे दूर

7. अमिताभ ठाकुर (1992 बैच IPS)

लगातार शासन-प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने और 2015 में मुलायम सिंह यादव से फोन पर विवाद के बाद चर्चा में आए अमिताभ ठाकुर को 2021 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी. इसके बाद उन्होंने ‘आजाद अधिकार सेना’ नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया, लेकिन अंततः वे चुनावी मैदान में नहीं उतरे.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: एसपी विभिन्न जिले, आईजी नागरिक सुरक्षा.
  • राजनीतिक स्थिति: अध्यक्ष – आजाद अधिकार सेना; फिलहाल सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर सक्रिय.

8. सुलखान सिंह (1980 बैच IPS)

2017 में योगी सरकार के पहले डीजीपी बने सुलखान सिंह अपनी साफ-सुथरी छवि के लिए जाने जाते हैं. रिटायरमेंट के 6 साल बाद 2023 में उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 15 जिलों को मिलाकर अलग राज्य बनाने की मांग के साथ ‘बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी’ बनाई. 2024 के चुनाव में प्रत्याशी उतारने का दावा करने के बावजूद पार्टी ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा और वे खुद भी चुनावी दौड़ से दूर रहे.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तर प्रदेश.
  • राजनीतिक स्थिति: अध्यक्ष – बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी; अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग में जुटे.

जिन्होंने अलग रास्ता चुना और चुनावी दंगल में खा गए मात

9. डॉ. चंद्रपाल (1972 बैच IAS)

केंद्र में प्रमुख सचिव पद से 2008 में रिटायर होने के बाद डॉ. चंद्रपाल ने 2009 में ‘आदर्श समाज पार्टी’ बनाई. उन्होंने आगरा की सुरक्षित सीट से तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उनका प्रदर्शन लगातार गिरता गया. 2009 में उन्हें मात्र 1,093 वोट (0.17%), 2019 में 2,802 वोट और 2024 में सिमटकर महज 643 वोट मिले.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: भारत सरकार में प्रमुख सचिव.
  • राजनीतिक स्थिति: तीन बार लोकसभा चुनाव लड़े, हर बार जमानत जब्त हुई.

10. राम बहादुर (1997 बैच IAS)

गोंडा के डीएम और एलडीए उपाध्यक्ष रहे राम बहादुर ने रिटायरमेंट के बाद 2014 और 2017 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार गए. इसके बाद उन्होंने ‘नागरिक एकता पार्टी’ बनाई और 2019 में फिर चुनाव हारे. लगातार विफलता के बाद उन्होंने अपनी पार्टी छोड़कर 2022 में भाजपा का दामन थाम लिया.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: डीएम गोंडा, वीसी लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA).
  • राजनीतिक स्थिति: तीन चुनाव हारने के बाद अब भाजपा में संगठन प्रभारी.

11. एसआर दारापुरी (1972 बैच IPS)

2003 में आईजी पद से रिटायर होने के बाद एसआर दारापुरी ने दलित, आदिवासी और मानवाधिकार आंदोलनों का नेतृत्व किया. उन्होंने 2009, 2014 और 2019 में सोनभद्र की रॉबर्ट्सगंज सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार करारी हार का सामना करना पड़ा. 2019 में उन्हें केवल 11,032 वोट मिले, जिसके बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति छोड़ दी.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: पुलिस महानिरीक्षक (IG) यूपी पुलिस.
  • राजनीतिक स्थिति: तीन बार चुनाव लड़े और हारे; सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय.

12. विजय शंकर पांडेय (1970 बैच IAS)

1992 में बाबरी विध्वंस के समय अयोध्या के डीएम रहे विजय शंकर पांडेय मायावती सरकार में प्रमुख सचिव रहे और यूपी के भ्रष्ट आईएएस अफसरों की लिस्ट जारी कर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे. 2015 में रिटायर होकर उन्होंने ‘लोक गठबंधन पार्टी’ बनाई और 2019 में अयोध्या लोकसभा सीट से खुद चुनाव लड़ा, जहां उन्हें मात्र 2,056 वोट मिले और वे 10वें नंबर पर रहे.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: डीएम फैजाबाद (अयोध्या), प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश.
  • राजनीतिक स्थिति: लोक गठबंधन पार्टी के संस्थापक; चुनावी मैदान में करारी शिकस्त झेली.

13. आलोक रंजन (1978 बैच IAS)

अखिलेश यादव की सरकार में मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन ने लखनऊ मेट्रो और आगरा एक्सप्रेस-वे जैसे ड्रीम प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारा. रिटायरमेंट के बाद वे सपा के मुख्य सलाहकार बने. 2024 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया, लेकिन पार्टी विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते वे चुनाव हार गए.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार.
  • राजनीतिक स्थिति: समाजवादी पार्टी के मुख्य रणनीतिकार, 2027 चुनाव की रणनीति में सक्रिय.

14. डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला (1982 बैच IPS)

डीजी भर्ती बोर्ड रहे डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने रिटायरमेंट से ठीक पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भाजपा के लिए प्रचार करने की इच्छा जताई थी. 2019 में वे भाजपा में शामिल तो हो गए, लेकिन पार्टी ने उन्हें अब तक किसी भी चुनाव में टिकट नहीं दिया है.

  • प्रमुख प्रशासनिक पद: डीजी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड.
  • राजनीतिक स्थिति: भाजपा सदस्य, 7 वर्षों से चुनावी टिकट के इंतजार में.

2027 के रण में उतरने की तैयारी कर रहे 2 IAS और 2 PCS अधिकारी

15. दिव्या मित्तल (2013 बैच IAS)

मिर्जापुर की डीएम रहते हुए आजादी के बाद पहली बार लहुरियादह गांव में पाइपलाइन से पीने का पानी पहुंचाकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाली दिव्या मित्तल ने अगस्त 2026 में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया. 29 सितंबर को उन्होंने राजनीति में आने का खुला ऐलान किया. माना जा रहा है कि वे मिर्जापुर जिले की किसी प्रमुख विधानसभा सीट से 2027 का चुनाव लड़ सकती हैं.

  • प्रमुख पहचान: मिर्जापुर और बरेली में विकास कार्यों के लिए लोकप्रिय.
  • 2027 का रोडमैप: मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की प्रबल दावेदार.

16. अभिषेक सिंह (2011 बैच IAS)

जौनपुर निवासी पूर्व आईएएस अभिषेक सिंह अक्सर चर्चाओं में रहे हैं. 2022 चुनाव में प्रेक्षक ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया पोस्ट और बाद में बिना सूचना अनुपस्थित रहने के चलते वे विवादों में रहे और अंततः इस्तीफा दे दिया. 2024 से वे जौनपुर में सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के बीच सक्रिय हैं और 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके हैं.

  • प्रमुख पहचान: चर्चित युवा चेहरा, पूर्व आईएएस अधिकारी.
  • 2027 का रोडमैप: जौनपुर क्षेत्र से विधानसभा चुनाव की दावेदारी.

17. डॉ. राकेश वर्मा (1997 बैच PCS / 2013 प्रमोटेड IAS)

बस्ती निवासी डॉ. राकेश वर्मा 1997 बैच के पीसीएस और बाद में प्रमोटेड आईएएस रहे. 2020 में वीआरएस लेने के बाद वे पहले चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी में रहे, लेकिन हाल ही में सितंबर 2026 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए. वे 2027 में बस्ती या आसपास की सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.

  • प्रमुख पहचान: पूर्व आईएएस, उद्योग एवं राजस्व विभागों का अनुभव.
  • 2027 का रोडमैप: कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव की तैयारी.

18. अलंकार अग्निहोत्री (2019 बैच PCS)

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने जनवरी 2026 में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्होंने ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ (RAM) नाम से अपना राजनीतिक संगठन खड़ा किया है और 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 403 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है.

  • प्रमुख पहचान: पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट बरेली.
  • 2027 का रोडमैप: अपनी पार्टी बनाकर 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा.

सिस्टम बदलने की चाह या सत्ता की लालसा?

उत्तर प्रदेश के पिछले 12 सालों का राजनीतिक इतिहास यह साफ साबित करता है कि जनता किसी पूर्व आईएएस या आईपीएस को सिर्फ उसकी प्रशासनिक डिग्री या पूर्व रुतबे के आधार पर वोट नहीं देती. चुनावी राजनीति की अपनी अलग अंकगणितीय और सामाजिक वास्तविकताएं हैं. जो अधिकारी सत्ताधारी कैडर के स्थापित सांगठनिक ढांचे के साथ जुड़े, वे तुरंत मंत्री बन गए; लेकिन जिन्होंने अपने बलबूते ‘सिस्टम बदलने’ के लिए नई पार्टियां बनाईं, उन्हें जनता ने नकार दिया. अब देखना होगा 2027 के चुनाव में जनता क्या गुल खिलाती है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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