उत्तर प्रदेश

2027 के लिए NDA का ‘मास्टर प्लान’, यूपी में बीजेपी-रालोद सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला तैयार

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश/रवि कुमार: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है. एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर शुरुआती स्तर पर बातचीत शुरू हो चुकी है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को देखते हुए दोनों दल इस बार ऐसा फॉर्मूला अपनाने पर विचार कर सकते हैं, जो पहले भी सफल माना जा चुका है. राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, कई सीटों पर उम्मीदवार भाजपा का हो सकता है, लेकिन चुनाव चिन्ह रालोद का रहेगा.

रालोद ने 33 से ज्यादा सीटों पर जताया दावा

सूत्रों के मुताबिक, रालोद ने भाजपा के सामने 33 से 35 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. पार्टी का कहना है कि उसकी यह मांग पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन पर आधारित है. रालोद का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसका मजबूत जनाधार है और इसी वजह से उसे गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए.

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. उस दौरान पार्टी ने 33 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. इनमें से 8 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि करीब 15 सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे थे. यही प्रदर्शन अब पार्टी की सीटों की दावेदारी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है.

कई सीटों पर अपनाया जा सकता है नया फॉर्मूला

पश्चिमी यूपी की कई सीटें जाट बहुल मानी जाती हैं, जहां रालोद का अच्छा प्रभाव है. दूसरी ओर, इन इलाकों में भाजपा के पास भी मजबूत स्थानीय नेता और मौजूदा विधायक मौजूद हैं. ऐसे में गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों दल एक नया चुनावी समीकरण अपना सकते हैं. इसके तहत भाजपा के नेता रालोद के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ सकते हैं. इससे दोनों दलों के बीच तालमेल भी बना रहेगा और स्थानीय स्तर पर असंतोष कम होने की संभावना रहेगी.


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मौजूदा विधायकों का टिकट बचाने की कोशिश

रालोद जिन सीटों पर दावा कर रहा है, उनमें कई सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं. यदि ये सीटें गठबंधन के तहत रालोद को मिलती हैं, तो भाजपा के मौजूदा विधायकों के टिकट पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से “रालोद का सिंबल, भाजपा का चेहरा” वाला फॉर्मूला सबसे व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है. इससे मौजूदा विधायकों को चुनाव लड़ने का मौका भी मिलेगा और गठबंधन धर्म भी निभाया जा सकेगा.

हालांकि सीटों का अंतिम बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है. दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत होनी बाकी है और हर सीट पर राजनीतिक समीकरणों का आकलन किया जाएगा. आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि गठबंधन किस फॉर्मूले पर चुनाव मैदान में उतरता है. फिलहाल इतना तय है कि मिशन 2027 को ध्यान में रखते हुए भाजपा और रालोद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत चुनावी तालमेल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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