UP New Salary Hike: नोएडा की सड़कों पर पिछले दिनों हुए उग्र मजदूर आंदोलन ने उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी थी. बढ़ती महंगाई और वेतन न बढ़ने से हताश मजदूरों के गुस्से ने जब विकराल रूप लिया, तो योगी सरकार को तुरंत एक्शन मोड में आना पड़ा. गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार ने न सिर्फ एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, बल्कि उसकी सिफारिशों को तुरंत मानते हुए पूरे राज्य में न्यूनतम मजदूरी की नई दरों को कानूनी मंजूरी दे दी है. राज्यपाल की मुहर लगने के बाद श्रम विभाग ने आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है.
वेतन वृद्धि को लेकर मजदूरों और नियोक्ताओं (फैक्ट्री मालिकों) के बीच की खाई को पाटने के लिए सरकार ने औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में एक हाई-पावर कमेटी बनाई थी. इस कमेटी ने महंगाई और क्षेत्रीय जीवन-यापन की लागत (Cost of Living) का बारीकी से अध्ययन कर पूरे उत्तर प्रदेश को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर दिया है. इसी आधार पर अब वेतन तय किया गया है, जिसमें मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) भी शामिल है.
दिल्ली से सटे नोएडा (गौतमबुद्धनगर) और गाजियाबाद में महंगाई और रहने का खर्च सबसे ज्यादा है, इसलिए इन्हें ‘प्रथम श्रेणी’ में रखा गया है.
प्रदेश के वे सभी जिले जहां नगर निगम मौजूद हैं (जैसे लखनऊ, कानपुर, आगरा आदि), उन्हें ‘द्वितीय श्रेणी’ में रखा गया है.
उत्तर प्रदेश के बाकी सभी बचे हुए जिलों को ‘तृतीय श्रेणी’ में रखा गया है, जहां जीवन-यापन की लागत महानगरों के मुकाबले थोड़ी कम है.
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दरअसल, साल 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन किन्हीं कारणों से लागू नहीं हो पाए थे. इसका नतीजा यह हुआ कि बढ़ती महंगाई और मकानों के किराए के दबाव के बीच मजदूरों का जीवनयापन बेहद कठिन हो गया था. दूसरी तरफ, फैक्ट्री मालिक भी वैश्विक आर्थिक दबाव और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में बाधाओं का हवाला देकर वेतन बढ़ाने से कतरा रहे थे. इसी गतिरोध ने नोएडा में औद्योगिक गतिविधियों को ठप कर दिया था.
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