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113 साल की सजा और मौत के बाद भी स्कैम! भारत का सबसे बड़ा ठग, जिसने ताजमहल और लाल किला तक बेच डाला

भारत के ठगी के इतिहास में अगर किसी एक नाम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, तो वह है नटवरलाल. बिहार के सिवान जिले में 1912 में जन्मे इस शख्स को देश का सबसे बड़ा ठग कहा जाता है. नटवरलाल ने अपने शातिर दिमाग से ताजमहल, लाल किला और यहां तक कि राष्ट्रपति भवन तक को बेचने का दावा किया था. उसकी ठगी की कहानियां इतनी मशहूर हैं कि आज भी लोगों को हैरानी होती है कि कोई इंसान इतना बड़ा स्कैम कैसे कर सकता है.

नटवरलाल का असली नाम मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव था, लेकिन वह अपने कारनामों के कारण “महाठग” के नाम से जाना जाने लगा. वह इतना शातिर था कि उसने ताजमहल को तीन बार, लाल किले को दो बार और राष्ट्रपति भवन को भी बेच दिया. यही नहीं, उसने खुद भारत के राष्ट्रपति के नकली सिग्नेचर कर करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया.

भारत के पहले राष्ट्रपति को भी कर दिया हैरान

कहा जाता है कि जब नटवरलाल की ठगी के चर्चे पूरे देश में गूंजने लगे, तो भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद खुद उससे मिलने उसके गांव गए. वहां नटवरलाल ने उनके सामने उनकी हूबहू सिग्नेचर कर दिखाए और यहां तक कह दिया कि अगर उसे मौका दिया जाए, तो वह विदेशों से लिया गया भारत का सारा कर्ज चुका सकता है.

नटवरलाल ने सिर्फ सरकार को ही नहीं, बल्कि कई नामी-गिरामी उद्योगपतियों को भी ठगा. कहा जाता है कि उसने धीरूभाई अंबानी, टाटा और बिड़ला जैसे बिजनेसमैन तक के साथ फ्रॉड किया था. उसके पास ठगी करने के इतने तरीके थे कि कोई भी आसानी से उसके जाल में फंस जाता था.

मौत के बाद भी कर डाला स्कैम

नटवरलाल पर छह से ज्यादा राज्यों में 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए थे और उसे कुल 113 साल की सजा सुनाई गई थी. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वह कई बार जेल से भाग निकला. आखिरी बार 1996 में वह कानपुर जेल से फरार हुआ था और इसके बाद वह कभी पकड़ा नहीं गया.

उसकी मौत को लेकर भी रहस्य बना हुआ है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उसकी मौत 2009 में हुई, जबकि उसके परिवार का दावा है कि वह 1996 में ही दुनिया को अलविदा कह चुका था. मजेदार बात यह है कि उसकी मौत के बाद भी सरकार को उसके नाम से जेल में खाना और अन्य सुविधाओं का बिल मिलता रहा, जिससे यह चर्चा भी होने लगी कि उसने मौत के बाद भी सरकार के साथ स्कैम कर दिया.

आज नटवरलाल को लोग ठगी के बादशाह के रूप में जानते हैं. बॉलीवुड में भी उसके जीवन पर फिल्में बन चुकी हैं और कई किताबों में उसके ठगी के तरीकों का जिक्र किया गया है. उस पर आधारित प्रमुख फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ (1979) है, जिसमें अमिताभ बच्चन ने मुख्य भूमिका निभाई थी. हालांकि, यह फिल्म पूरी तरह से नटवरलाल के जीवन पर आधारित नहीं है, लेकिन उनके नाम और ठगी के कारनामों से प्रेरित है. नटवरलाल का नाम आज भी ठगी और जालसाजी के मामलों में सबसे ऊपर लिया जाता है.

-भारत एक्सप्रेस

Prashant Rai

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