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नेपाल से आए मलबे ने तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट को किया तबाह, शी जिनपिंग ने दिए रेस्क्यू ऑपरेशन के आदेश

चीन और नेपाल की सीमा पर आज (बुधवार) सुबह अचानक आए भीषण भूस्खलन ने तबाही मचा दी है. नेपाल की तरफ से शुरू हुआ यह मलबा कुछ ही देर में चीन के तिब्बत स्थित ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंच गया और वहां मौजूद अहम बॉर्डर चेकपॉइंट को अपनी चपेट में ले लिया. सामने आए CCTV फुटेज में हादसे की भयावह तस्वीर दिखाई दे रही है. कुछ सेकंड के भीतर मिट्टी और पत्थरों का तेज बहाव पूरे रास्ते को ढक देता है. इस दौरान वहां मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आते हैं, जबकि कई वाहन और बसें मलबे की चपेट में आती दिख रही हैं.

चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, यह भूस्खलन बुधवार सुबह करीब 9 बजे शुरू हुआ. इसका असर नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के शिगात्से शहर के प्रशासन वाले ग्यिरोंग काउंटी में भी पड़ा. हादसे में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने और कई लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. हालांकि, अभी तक मौतों और घायलों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है.

हादसे का असर नेपाल की तरफ भी बेहद गंभीर बताया जा रहा है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, कुल 384 पर्यटक और यात्री लापता हैं. इनमें 93 नेपाली नागरिक और 291 विदेशी नागरिक शामिल हैं. लापता विदेशी नागरिकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन और नीदरलैंड के लोग भी बताए जा रहे हैं. 111 लोगों की राष्ट्रीयता की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है.

CCTV वीडियो में जैसे मलबा बॉर्डर इलाके में पहुंचता दिखाई दे रहा है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का ज्यादा मौका नहीं मिला होगा. हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.

बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान

हादसे के बाद चीन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्थानीय अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश और घायलों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया है. उन्होंने प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने, घायलों का जल्द इलाज कराने और आगे होने वाले नुकसान को रोकने पर भी जोर दिया.

चीनी सेना और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के जवान घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं. इसके अलावा, चीन की सरकारी निर्माण और आपदा प्रतिक्रिया कंपनी चाइना एनेंग कंस्ट्रक्शन ग्रुप ने करीब 200 बचावकर्मियों, भूवैज्ञानिकों और इंजीनियरों को मौके पर भेजा है. जरूरत पड़ने पर 100 और लोगों को भेजने की तैयारी है.

बचाव दल अपने साथ भारी मशीनरी के अलावा ड्रोन, 3D लेजर स्कैनर और लोगों की मौजूदगी का पता लगाने वाले लाइफ डिटेक्टर जैसे उपकरण भी लेकर पहुंचा है. अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारी मात्रा में जमा मलबे के बीच लापता लोगों तक पहुंचना है. खराब मौसम और दोबारा भूस्खलन का खतरा बचाव अभियान को और मुश्किल बना सकता है.

हादसे के बाद ग्यिरोंग बॉर्डर चेकपॉइंट की ओर जाने वाली सड़क को अगले सात दिनों के लिए बंद कर दिया गया है. घटनास्थल से सामने आए अन्य वीडियो में सड़कें कीचड़ और मलबे से पूरी तरह ढकी नजर आ रही हैं. कुछ जगहों पर भारी मात्रा में पानी और मलबा नदी की ओर बहता दिखाई दे रहा है.

नेपाल में मौजूद चीनी दूतावास ने भी आपात प्रतिक्रिया व्यवस्था सक्रिय कर दी है. दूतावास ने प्रभावित क्षेत्र में मौजूद चीनी नागरिकों और कंपनियों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की है और नेपाल सरकार से व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने की अपील की है.

नेपाल-चीन व्यापार के लिए बेहद अहम है ग्यिरोंग पोर्ट

ग्यिरोंग पोर्ट सिर्फ एक सीमा चौकी नहीं है. यह तिब्बत का नेपाल के साथ विदेशी व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है. चीन और नेपाल के बीच होने वाले व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. कोरोना महामारी के दौरान आवाजाही प्रभावित होने के बाद 2022 में यहां दोतरफा माल और यात्री आवागमन दोबारा शुरू हुआ था. इसके बाद इस रास्ते से व्यापार में तेजी आई.

2023 से ग्यिरोंग पोर्ट चीन से नेपाल को इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्यात के लिए भी एक अहम केंद्र बन गया है. ऐसे में लंबे समय तक सीमा मार्ग बंद रहने से दोनों देशों के व्यापार और परिवहन पर असर पड़ सकता है.

हालांकि, इस साल की शुरुआत में आई अचानक बाढ़ के कारण भी इस सीमा मार्ग पर सैकड़ों वाहन फंस चुके हैं. इन रुकावटों का असर नेपाल में इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात पर भी पड़ा. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, जुलाई के मध्य में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में नेपाल के इलेक्ट्रिक वाहन आयात में करीब 24 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

चीन के लिए नेपाल क्यों है रणनीतिक रूप से अहम?

नेपाल चीन के लिए सिर्फ पड़ोसी देश नहीं, बल्कि हिमालय के जरिए दक्षिण एशिया तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण रास्ता भी है. दूसरी ओर, नेपाल लंबे समय से भारत पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने के विकल्प तलाशता रहा है. चीन के साथ सीमा व्यापार और संपर्क बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा है.

चीन नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और नेपाल के कुल व्यापार में उसकी हिस्सेदारी करीब 16.9 फीसदी बताई जाती है. चीन नेपाल के लिए छह सीमा बिंदुओं के जरिए व्यापार और ट्रांजिट की सुविधा देता है, जिनमें से पांच तिब्बत के शिगात्से क्षेत्र में हैं.

2017 में नेपाल चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में शामिल हुआ था. इसके बाद दोनों देशों ने हिमालय के पार रेल और सड़क संपर्क समेत कई बड़ी परियोजनाओं की योजना बनाई. 2018 में चीन ने नेपाल के साथ तथाकथित ट्रांस-हिमालयन मल्टी-डायमेंशनल कनेक्टिविटी नेटवर्क विकसित करने की घोषणा की थी.

यह भी पढ़ें-तिब्बत से नेपाल में घुसी मौत! सैलाब ने मचाया भयानक तांडव; गायब हो गए गांव

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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