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क्या होते हैं ‘फैराडे बैग’? जिनमें चीन ले लौटते समय पैक डोनाल्ड ट्रंप टीम के फोन

Donald Trump China Visit Update: कहते हैं मेहमाननवाजी में चीन का कोई मुकाबला नहीं, लेकिन जब मेहमान डोनाल्ड ट्रंप हों, तो कहानी में ट्विस्ट आना लाजमी है. ट्रंप साहब चीन की यात्रा पर तो गए वहां की खातिरदारी का लुत्फ भी उठाया, लेकिन लौटते वक्त जो हुआ… उसने बीजिंग को ‘मिर्ची’ लगा दी है. सोशल मीडिया पर एक गजब का दावा वायरल हो रहा है कि अमेरिकी डेलिगेशन ने चीन से मिले सारे गिफ्ट्स, बैज और यहां तक कि फोन भी प्लेन पर चढ़ने से पहले सीधे डस्टबिन के हवाले कर दिए.

यानी सीधे शब्दों में कहें तो पहले प्यार से यात्रा की, फिर सरेआम ‘जलील’ कर दिया. लेकिन ट्रंप ने आखिर ऐसा किया क्यों? आइए इसकी इनसाइड स्टोरी को थोड़े हल्के-फुल्के अंदाज में समझते हैं.

सीढ़ियों के नीचे डस्टबिन (Donald Trump China Visit News)

यह पूरा ड्रामा तब सुर्खियां बना जब पत्रकार एमिली गुडिन ने ‘X’ (ट्विटर) पर एक मजेदार वाकया शेयर किया. उन्होंने बताया कि जैसे ही राष्ट्रपति का विमान ‘एयर फोर्स वन’ उड़ान भरने के लिए तैयार था, अमेरिकी स्टाफ ने एक बड़ा सा डस्टबिन ढूंढा. इसके बाद चीनी अधिकारियों द्वारा दिए गए चमचमाते क्रेडेंशियल्स, डेलिगेशन पिन और सारे गिफ्ट्स को प्लेन की सीढ़ियों के नीचे ही कचरे में स्वाहा कर दिया गया. साफ फरमान था चीन की एक भी चीज विमान के अंदर पैर नहीं रखेगी.

‘गिफ्ट’ के बहाने कहीं ‘जासूसी’ का खेल तो नहीं?

अब आप सोच रहे होंगे कि ट्रंप और उनके स्टाफ ने इतनी बेरहमी क्यों दिखाई? तो भाई साहब, इसके पीछे कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं, बल्कि ‘साइबर जासूसी’ का भयंकर डर था. अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को शक था कि चीन जो गिफ्ट, पेन या बैज दे रहा है, उसमें कोई छोटा सा ‘लोचा’ (यानी जासूसी चिप या ट्रैकिंग डिवाइस) हो सकता है. अब एयर फोर्स वन में चीनी ‘जासूस’ बैठ जाए, ये अमेरिका को कैसे मंजूर होता!

बर्नर फोन और ‘फैराडे बैग’ का तड़का (Donald Trump China Visit Security)

चीन के इस दौरे पर अमेरिकी डेलिगेशन की सुरक्षा किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म जैसी थी. अधिकारियों को अपने पर्सनल फोन छूने तक की इजाजत नहीं थी. उन्हें रास्ते के लिए ‘बर्नर फोन’ (अस्थायी फोन) दिए गए थे, जिन्हें काम खत्म होते ही फेंक दिया गया. जिन अधिकारियों के पास पर्सनल फोन थे, उन्हें ‘फैराडे बैग’ में बंद कर दिया गया था. ये ऐसे बैग होते हैं जो हर तरह के सिग्नल और ट्रैकिंग को ब्लॉक कर देते हैं. यानी नेटवर्क का ‘काम तमाम’.

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हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस पर कोई आधिकारिक बयान देकर चीन के जख्मों पर नमक नहीं छिड़का है, लेकिन इस ‘डस्टबिन डिप्लोमेसी’ ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका और चीन के बीच का अविश्वास अब किस लेवल पर पहुंच चुका है. चीन भले ही ‘मेड इन चाइना’ का डंका बजाए, लेकिन ट्रंप ने जाते-जाते कह दिया नो थैंक्स, इसे डस्टबिन में ही रहने दो.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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