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पूजा का अधिकार मिलते ही भोजशाला में गूंजी हनुमान चालीसा, छावनी में तब्दील हुआ पूरा धार

Dhar Bhojshala Puja: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला विवाद पर इंदौर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानते हुए 2003 के आदेश को रद्द कर दिया है. इसके बाद से आज सुबह से ही भारी संख्या में भक्त पूजा के लिए पहुंच रहे हैं.

Dhar Bhojshala Puja: मध्य प्रदेश के धार जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है. दशकों से चले आ रहे विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपना अहम फैसला सुना दिया है. अदालत ने अपने निर्णय में इस विवादित स्थल को राजा भोज के काल का ‘वाग्देवी’ (देवी सरस्वती) का प्राचीन मंदिर माना है और हिंदू पक्ष को यहां निर्बाध पूजा करने का अधिकार दे दिया है.

इस बड़े फैसले के आते ही धार शहर में हलचल तेज हो गई है. पुलिस-प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पूरे धार जिले और भोजशाला परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया है.

बदल गई भोजशाला की तस्वीर

कोर्ट का फैसला आते ही मंगलवार सुबह का दृश्य पूरी तरह बदला हुआ नजर आया. बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विभिन्न समितियों से जुड़े लोग भोजशाला पहुंचे. भारी सुरक्षा व्यवस्था और शांतिपूर्ण माहौल के बीच श्रद्धालुओं ने वाग्देवी के दर्शन किए, पूजा-अर्चना की और परिसर में ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ भी किया.

भोजशाला मुक्ति यज्ञ से जुड़े संयोजक गोपाल शर्मा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “इस स्थल की संरचना और इसका हर एक अंश यह चीख-चीख कर कहता है कि यह एक प्राचीन मंदिर रहा है. वर्षों बाद बिना किसी रुकावट के पूजा करने का अवसर मिलना हमारी आस्था की जीत है.”

रद्द हुआ 2003 का नमाज वाला आदेश (Dhar Bhojshala Verdict)

हिंदू पक्ष की ओर से इस मामले में पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के मशहूर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इसे एक बड़ी कानूनी जीत बताया. अदालत ने वर्ष 2003 में जारी किए गए उस आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार यहां सीमित समय के लिए नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी.

ASI के पास ही रहेगा नियंत्रण

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस स्थल से जुड़े ऐतिहासिक और पुरातात्विक पहलुओं का भी गहराई से जिक्र किया है. अदालत ने माना कि भोजशाला का निर्माण ऐतिहासिक भोज-परमार वंश के समय में हुआ था. वर्ष 1904 से इसे ‘संरक्षित स्मारक’ का दर्जा प्राप्त है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इस पूरे परिसर का प्रबंधन, नियंत्रण और देखरेख आगे भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के ही पास रहेगा.

सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी कानूनी लड़ाई? (bhojshala dispute)

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं. मुस्लिम पक्ष की ओर से इस फैसले को चुनौती देने और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के साफ संकेत मिल रहे हैं. मुस्लिम पक्ष के इस संभावित कदम को भांपते हुए हिंदू पक्ष भी अलर्ट मोड में आ गया है. हिंदू पक्ष ने एहतियातन सुप्रीम कोर्ट में दो कैविएट (Caveat) याचिकाएं दाखिल कर दी हैं, ताकि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में कोई भी एकतरफा आदेश या स्टे (Stay) देने से पहले उनका पक्ष जरूर सुने.

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अब आगे क्या? (Who won Dhar Bhojshala case)

फिलहाल, इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पूरे धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है. चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है और प्रशासन हर स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि शहर का सांप्रदायिक सौहार्द न बिगड़े. कुल मिलाकर, भोजशाला विवाद का यह फैसला सिर्फ एक कानूनी नजीर नहीं है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक पटल पर भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे.



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