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डोनाल्ड ट्रंप का ‘सात युद्धों’ वाला झूठ! कौन-कौन सी जंग के लिए नोबेल प्राइज मांग रहे हैं ‘स्वयंभू’ शांतिदूत?

Donald Trump Nobel Prize: ‘दुनिया में कोई भी घटना हो, क्रेडिट मेरा है’. यह बात अक्सर डोनाल्ड ट्रंप कहते रहते हैं. भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव हो या इजरायल और ईरान की जंग या फिर  सर्बिया और कोसोवो के बीच उलझे मामले का निपटारा हर बात का क्रेडिट डोनाल्ड ट्रंप मांग रहे हैं. सबसे बड़े और खास बात यह कि वो अपने ही झूंठे दावों को लेकर नोबेल प्राइज की भी मांग कर रहे हैं. पहले उन्होंने भारत, पाकिस्तान पर इसे लेकर दबाव बनाया और अब एक बार फिर से वह यही राग अलापने लगे हैं. इस बार उन्होंने दावा किया है कि 7 जंग उनके कारण रुकी हैं.

एक तरफ जहां दुनिया की राजनीति उथल-पुथल से गुजर रही है, वहीं ‘स्वयंभू’ शांतिदूत डोनाल्ड ट्रंप खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का सबसे बड़ा हकदार बता रहे हैं. उनका दावा है कि उन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि सात युद्धों को खत्म कराया है. अब सवाल यह है कि आत्ममुग्धता में किए गए दावों में आखिर वो 7 जंग कौन सी हैं?

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए डोनाल्ड ट्रंप का दावा

कुछ समय पहले ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर नोबेल प्राइज मांगा था. पीएम मोदी से फोन पर भी उन्होंने नॉमिनेशन के लिए दबाव बनाया था. हालांकि, उनकी बात बनी नहीं. अब ब्रिटेन दौरे पर उन्होंने एक बार फिर से खुद को स्वयंभू शांतिदूत बनाकर पेश किया है और कहा है कि 7 जंग रोकने पर उन्हें हर एक के लिए नोबेल शांति पुरस्कार (Donald Trump Nobel Prize Nominee) दिया जाना चाहिए.

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डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दावे में कौन से देश शामिल हैं?

  1. आर्मेनिया और अजरबैजान: दावा है कि दोनों देशों के नेताओं ने ट्रंप की पहल पर शांति वार्ता की और समझौते के लिए तैयार हुए.
  2. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और रवांडा: जून में ट्रंप की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने शांति की दिशा में बढ़ने का दावा किया, हालांकि तनाव फिर से शुरू हो गया.
  3. इजरायल और ईरान: ट्रंप ने दोनों देशों के बीच सीजफायर की घोषणा की, लेकिन यह दावा अभी भी विवादित है.
  4. थाइलैंड और कंबोडिया: ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच मंदिर विवाद को सुलझाने में मदद की, लेकिन मलेशिया के मध्यस्थता के बाद मामला सुलझा.
  5. मिस्र और इथियोपिया: ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने नील नदी विवाद को सुलझाने में मदद की, लेकिन दोनों देशों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.
  6. सर्बिया और कोसोवो: डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद की, जिसे वे अपने शांति समझौतों में गिनाते हैं.
  7. भारत और पाकिस्तान: दावा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर में मध्यस्थता की, लेकिन भारत ने इससे इनकार कर दिया.

किन-किन ने की वकालत (Who will get Nobel Peace Prize)

नोबेल (Nobel Peace Prize) के लिए बने नियमों की मानें तो केवल नामांकन करने से सीधे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलता. नोबेल कमेटी की अपनी प्रक्रिया होती है, जिसमें नामांकन भेजने के बाद एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ट्रंप के मामले में समर्थन करने वाले देशों के नामांकन का असर केवल माहौल बनाने तक है, असली फैसला नोबेल कमेटी करेगी.

  • पाकिस्तान: ट्रंप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ऑफिशियली नामांकित किया है.
  • कंबोडिया: माना कि ट्रंप ने थाइलैंड के साथ विवाद को रोकने में मध्यस्थता की.
  • आर्मेनिया और अजरबैजान: माना कि ट्रंप की कोशिश उन्हें नोबेल का हकदार बनाती हैं.
  • इजरायल: एकाध बार कह चुका है कि वो ट्रंप को इसका असल हकदार मानता है.

मुश्किल है नोबेल का मिलना (Why Donald Trump won’t get Nobel Prize)

ट्रंप का नोबेल पाने का सपना और उनके द्वारा सात युद्धों को खत्म कराने का दावा एक बार फिर यह साबित करता है कि वे हर घटना को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. भारत ने तो साफ-साफ कह दिया है कि सीजफायर में अमेरिका का कोई हाथ नहीं था. ट्रंप के दावे भले ही कुछ देशों से समर्थन हासिल कर रहे हों, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार समिति का निर्णय केवल प्रचार या दावों पर आधारित नहीं होता. यह उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के विपरीत है. ऐसे में, ट्रंप का यह शांतिदूत वाला दावा उनकी खुद की ही छवि को और भी संदेहास्पद बना देता है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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