संयुक्त राष्ट्र (UN) के सबसे बड़े मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और अमानवीय चेहरे को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान की कड़ी क्लास लगाते हुए उस पर ‘ट्रेड और ट्रांजिट टेरर’ फैलाने का गंभीर आरोप लगाया. भारत ने स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय नियमों, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मानकों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की धज्जियां उड़ाकर एक लैंडलॉक्ड देश की जीवनरेखा को काटने की साजिश रच रहा है.
पी हरीश ने सुरक्षा परिषद और वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए दो-टूक कहा कि पाकिस्तान लगातार अफगान व्यापार के रास्ते में अवैध अड़ंगे लगा रहा है. भारत ‘लैंड लॉक्ड डेवलपिंग कंट्रीज (LLDCs) पर UN डिक्लेरेशन’, WTO नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करते हुए अफगानिस्तान पर थोपे गए ‘ट्रेड और ट्रांजिट टेरर’ की कड़े शब्दों में निंदा करता है. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को को व्यापारिक पहुंच से वंचित करना अंतरराष्ट्रीय अपराध और आर्थिक आतंकवाद के समान है.
पाकिस्तान द्वारा 4 मिलियन (40 लाख से अधिक) बेबस अफगान शरणार्थियों को जबरन अपने देश से खदेड़े जाने के अमानवीय फैसले पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र की ढिलाई को भी कठघरे में खड़ा किया. पी. हरीश ने इस अमानवीय निष्कासन पर यूएन के भीतर जरूरी तत्परता की कमी की खुलकर आलोचना की.
उन्होंने बताया कि भारत ने जमीनी स्तर पर मानवीय मदद का हाथ बढ़ाते हुए बेघर हुए इन अफगान शरणार्थियों की मुश्किलें कम करने के लिए तत्काल आपातकालीन टेंट और राहत सामग्री भेजी है. जहां पाकिस्तान अफगानिस्तान के लिए संकट खड़ा कर रहा है, वहीं भारत ने संकट की हर घड़ी में अफगान जनता का साथ निभाया है.
भारत ने अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से अधिक विकास परियोजनाओं को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा है. मानवीय सहायता के तहत 50,000 टन गेहूं, 450 टन जीवनरक्षक दवाएं व वैक्सीन और टिड्डी दल के हमलों से फसलों को बचाने के लिए 40,000 लीटर कीटनाशक (पेस्टिसाइड) उपलब्ध कराए. भारत ने 2023 से अब तक 1,000 अफगान छात्राओं को स्कॉलरशिप दी है और जमीनी स्तर पर महिलाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) को निरंतर वित्तीय मदद दे रहा है.
भाषण के अंत में भारतीय प्रतिनिधि पी. हरीश ने दो-टूक शब्दों में कहा कि अफगानिस्तान को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता, यह पूरे विश्व की एक ‘सामूहिक जिम्मेदारी’ है और इस दायित्व को निभाने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को अपनी निर्णायक भूमिका निभानी होगी.
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