अमेरिका के न्यूयॉर्क में अटॉर्नी जनरल पद का चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है. मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को चुनौती दे रहीं भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमातिरेड्डी को प्रमुख अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट के संपादकीय बोर्ड का समर्थन मिला है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य में 24 अक्टूबर से अर्ली वोटिंग यानी मतदान की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हो रही है.
शुक्रवार को प्रकाशित अपने संपादकीय में न्यूयॉर्क पोस्ट ने सरिता कोमातिरेड्डी के समर्थन की घोषणा की. अखबार ने उनके कानूनी अनुभव और अपराध से जुड़े मामलों में काम करने के अनुभव को प्रमुखता से रखा. वहीं, मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स की कार्यशैली पर सवाल उठाए. हालांकि, यह समर्थन अखबार के संपादकीय बोर्ड की राय है, इसे मतदाताओं के रुख का संकेत नहीं माना जा सकता.
न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, 41 वर्षीय सरिता कोमातिरेड्डी एक अनुभवी अभियोजक हैं. उन्होंने अपने करियर के दौरान आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी भ्रष्टाचार जैसे मामलों पर काम किया है. ब्रुकलिन स्थित ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क में संघीय अभियोजक के रूप में भी उन्होंने कई गंभीर मामलों को संभाला.
सरिता का कहना है कि अगर उन्हें अटॉर्नी जनरल बनने का मौका मिलता है, तो वह अपने पद की शक्तियों का इस्तेमाल अपराध, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए करेंगी. वह न्यूयॉर्क की सड़कों को सुरक्षित बनाने को भी अपने अभियान का अहम मुद्दा बता रही हैं.
अखबार ने अपने संपादकीय में लेटिशिया जेम्स की आलोचना करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित नेता बताया. संपादकीय में जेम्स के उस बयान का भी जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अटॉर्नी जनरल का पद मुख्य रूप से दीवानी मामलों पर केंद्रित होता है, न कि आपराधिक मामलों पर.
अपने चुनाव अभियान में सरिता कोमातिरेड्डी न्यूयॉर्क में सुरक्षा के मुद्दे को लगातार उठा रही हैं. उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि उनके परिवार और परिचितों को भी शहर में अपराध से जुड़ी घटनाओं का सामना करना पड़ा है.
सरिता के अनुसार, उनके परिवार के एक सदस्य पर बच्चों को स्कूल ले जाते समय सबवे में हमला हुआ था. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी एक पारिवारिक मित्र के बेडरूम में सोते समय गोली आकर लगी थी.
इन घटनाओं का हवाला देते हुए सरिता ने दावा किया कि न्यूयॉर्क के लोग पहले के मुकाबले खुद को कम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से नहीं निभाया.
हालांकि, सुरक्षा को लेकर सरिता के ये बयान उनके चुनावी अभियान का हिस्सा हैं. इन आरोपों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि शहर में अपराध की स्थिति के लिए अकेले अटॉर्नी जनरल जिम्मेदार हैं.
चुनाव से पहले सामने आए सर्वेक्षणों में दोनों उम्मीदवारों के समर्थन को लेकर अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली है. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सरिता कोमातिरेड्डी का चुनाव अभियान ऑनमैसेज इंक. के एक आंतरिक सर्वेक्षण का हवाला दे रहा है.
12 से 14 अक्टूबर के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में 1,000 संभावित मतदाताओं की राय ली गई थी. इसके मुताबिक, लेटिशिया जेम्स को 50.7 प्रतिशत और सरिता कोमातिरेड्डी को 44.7 प्रतिशत समर्थन मिला. यानी सर्वे में जेम्स को छह प्रतिशत अंकों की बढ़त दिखाई गई.
सर्वेक्षण में 8 अक्टूबर को दोनों उम्मीदवारों की बहस देखने वाले लोगों के बीच भी समर्थन के आंकड़े दिए गए. इस समूह में सरिता को 81 प्रतिशत और जेम्स को 19 प्रतिशत समर्थन मिलने का दावा किया गया. हालांकि, यह आंकड़ा केवल बहस देखने वाले लोगों के समूह से संबंधित है, इसे सभी मतदाताओं की पसंद नहीं माना जाना चाहिए.
दूसरी ओर, पिछले महीने सिएना कॉलेज की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में लेटिशिया जेम्स को 13 प्रतिशत अंकों की बढ़त के साथ दिखाया गया था. जेम्स के चुनाव अभियान ने सरिता के अभियान की ओर से पेश किए गए आंतरिक सर्वेक्षण को खारिज कर दिया है.
सरिता कोमातिरेड्डी के अभियान को लेकर लेटिशिया जेम्स की टीम ने भी जवाबी हमला किया है. जेम्स के चुनाव अभियान की एक प्रवक्ता ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि सरिता न्यूयॉर्क के लोगों को धोखाधड़ी करने वालों या संघीय सरकार से नहीं बचा पाएंगी, क्योंकि उनके अभियान को उन्हीं लोगों का समर्थन मिल रहा है.
प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ट्रंप ने सरिता का समर्थन किया है और वह न्यूयॉर्क में ट्रंप की नीतियों या कदमों पर आंखें मूंद सकती हैं. ये आरोप जेम्स के चुनाव अभियान की ओर से लगाए गए हैं.
गौरतलब है कि लेटिशिया जेम्स पहली बार 2018 में न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल चुनी गई थीं. इसके बाद 2022 में उन्होंने दोबारा यह पद हासिल किया. राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें उस समय व्यापक पहचान मिली, जब उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और उनकी कंपनी के खिलाफ दीवानी धोखाधड़ी का मामला दायर किया था.
न्यूयॉर्क में अर्ली वोटिंग 24 अक्टूबर से 1 नवंबर तक चलेगी, जबकि आम चुनाव 3 नवंबर को निर्धारित है. शुरुआती मतदान के दौरान मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत चुनाव में अपना वोट डाल सकेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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